
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। हालांकि, कोलकाता पुलिस ने उन सभी आरोपों को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि राज्य सरकार ने जानबूझकर उनकी सुरक्षा वापस ले ली है।
टीएमसी नेताओं ने सोशल मीडिया पर साझा किया वीडियो
बुधवार रात टीएमसी के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन और सागरिका घोष के साथ लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया। वीडियो में दक्षिण कोलकाता के कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के आवास के बाहर बनी पुलिस चौकी खाली दिखाई दे रही थी।
टीएमसी नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन के निर्देश पर ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था हटा दी गई है, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
पुलिस का जवाब- सुरक्षा में कोई कटौती नहीं
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कोलकाता पुलिस के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि ममता बनर्जी की सुरक्षा में किसी तरह की कमी नहीं की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, उनकी सुरक्षा में तैनात दो निजी सुरक्षा अधिकारियों (पीएसओ) का नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत स्थानांतरण किया गया है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि ममता बनर्जी चाहती थीं कि मुख्यमंत्री रहते हुए उनकी सुरक्षा संभालने वाले वही दो अधिकारी इस जिम्मेदारी पर बने रहें, लेकिन सरकारी नियमों के तहत किसी भी अधिकारी की नियुक्ति व्यक्तिगत पसंद के आधार पर नहीं की जा सकती।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि सुरक्षा कर्मियों का तबादला तय ड्यूटी रोस्टर और सरकारी प्रोटोकॉल के अनुसार किया जाता है और यह एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है।
नए अधिकारियों को ड्यूटी संभालने नहीं दिया गया
सूत्रों के अनुसार, बुधवार रात जिन दो नए सुरक्षा अधिकारियों को कालीघाट स्थित आवास पर भेजा गया था, उन्हें ममता बनर्जी और उनके सहयोगियों ने ड्यूटी संभालने की अनुमति नहीं दी। बताया जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री उन अधिकारियों से परिचित नहीं थीं।
पुलिस ने यह भी कहा कि ममता बनर्जी के आवास की सुरक्षा कम नहीं, बल्कि और मजबूत की गई है। बुधवार से उनके घर के बाहर अतिरिक्त और ऊंचे सुरक्षा बैरिकेड भी लगाए गए हैं।




