
-लखनऊ एलडीए में चल रहे भ्रष्टाचार को लेकर विजलेंस ने किया बड़ा खुलासा, हर फाइल पर ली जाती है मोटी रकम
- रिपोर्ट: ज्ञानेश वर्मा / यूपी हेड
लखनऊ: उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) की लखनऊ सेक्टर टीम ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक जूनियर इंजीनियर (JE), एक सुपरवाइजर और एक कथित बिचौलिए को 7.50 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई विजिलेंस की आईजी मंजिल सैनी और एसपी बबीता सिंह के निर्देशन में की गई।
विजिलेंस के अनुसार, शिकायतकर्ता ने उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान के लखनऊ सेक्टर में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने आरोप लगाया कि LDA के जोन-5 कार्यालय में तैनात जूनियर इंजीनियर दिनेश कुमार वर्मा उसके निर्माणाधीन मकान पर पहुंचे और IGRS पोर्टल पर शिकायत का हवाला देकर निर्माण कार्य रुकवाने की धमकी दी। बाद में उसे मामले का निस्तारण कराने के लिए LDA कार्यालय बुलाया गया।

15 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप:
शिकायत के मुताबिक, LDA कार्यालय में JE दिनेश कुमार वर्मा और सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश ने कार्रवाई से बचाने के एवज में 15 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की। शिकायतकर्ता द्वारा इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताने पर सौदा दो किस्तों में तय हुआ और पहली किस्त 7.50 लाख रुपये निर्धारित की गई।
बिचौलिए के जरिए वसूली का आरोप:
विजिलेंस जांच में यह भी सामने आया कि रिश्वत की वसूली के लिए अधिकारियों ने कथित तौर पर बाहरी व्यक्ति श्रवण कुमार द्विवेदी को अपने साथ मिला रखा था। आरोप है कि वह लोगों को IGRS शिकायत और कार्रवाई का भय दिखाकर अधिकारियों के साथ मिलकर अवैध वसूली करता था। शिकायतकर्ता ने विजिलेंस को मोबाइल कॉल रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्य भी उपलब्ध कराए थे।
जाल बिछाकर तीनों को किया गिरफ्तार:
शिकायत की पुष्टि होने के बाद विजिलेंस टीम ने ट्रैप की योजना बनाई। शनिवार को शिकायतकर्ता तयशुदा 7.50 लाख रुपये लेकर LDA कार्यालय पहुंचा। जैसे ही आरोपियों ने रिश्वत की रकम अपनी गाड़ी में ली, विजिलेंस टीम ने छापा मारकर JE दिनेश कुमार वर्मा, सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश और कथित बिचौलिए श्रवण कुमार द्विवेदी को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। मौके से पूरी रिश्वत की रकम भी बरामद कर ली गई।
पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी विजिलेंस:
विजिलेंस अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। प्रारंभिक जांच में रिश्वतखोरी के एक संगठित नेटवर्क के संकेत मिले हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है और जल्द ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।




