
नोएडा। सामाजिक संगठन माय होम इंडिया द्वारा “स्वातंत्र्यवीर सावरकर जयंती महोत्सव 2026” के अवसर पर नोएडा एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन सभागार में एक गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रनायक स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर के अद्वितीय राष्ट्रसेवा, त्याग, साहस, राष्ट्रभक्ति एवं सामाजिक चेतना से परिपूर्ण जीवन को स्मरण करना तथा उनके विचारों को जनमानस तक पहुंचाना था।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने स्वातंत्र्यवीर सावरकर के राष्ट्र निर्माण में योगदान, स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका तथा राष्ट्रीय एकता एवं सांस्कृतिक चेतना के प्रति उनके समर्पण पर विस्तार से प्रकाश डाला।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता श्री सुरेश चव्हाणके जी ने अपने संबोधन में स्वातंत्र्यवीर सावरकर के विचारों की प्रासंगिकता और राष्ट्रहित में उनके योगदान पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि कांग्रेस इकोसिस्टम ने वीर सावरकर की उपलब्धियों को कम आंकने और एक फ्रेम में कैद करने के लिए दुष्प्रचार किया, जबकि वो ऐसे कर्मयोगी थे जो बहुत सारे क्षेत्रों में पारंगत थे।

सुरेश चव्हाणके ने कहा कि सावरकर कहते थे कि हिन्दुओं को “सदगुण विकृति” की मानसिकता का त्याग करना चाहिए। हम सज्जन दिखने के लोभ, लालसा में दुर्जनों को रोकने से संकोच करते हैं। राष्ट्रहित, और देश की सुरक्षा, समृद्धि के मार्ग में ये मानसिकता बहुत बड़ा अवरोध है। चाहे प्राण जाएं या फिर चरित्र पर कलंक लगें या अपने मित्र बुरा मानें लेकिन राष्ट्र को सशक्तिकरण के लिए किसी भी बदनामी से ना डरें।
उन्होंने आगे कहा कि विनायक दामोदर सावरकर इतिहास का पुनर्गठन का बड़ा कार्य किया और कहा कि भाषा सुधार के माध्यम से ही स्वतंत्रता क्रांति संभव है। वो बड़े समाज सुधारक थे जिन्होंने मुस्लिमों, अंग्रेजों के कारण जो जातीय व्यवस्था और वैमनस्य हुआ उसको खत्म करने के लिए अभूतपूर्व कार्य किया। इसके लिए बाबा साहब अंबेडकर ने भी उनकी प्रशंसा की।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री श्री जसवंत सिंह सैनी जी ने कहा कि औद्योगिक नगरी नोएडा में वीर सावरकर जैसे महापुरुष की जयंती कार्यक्रम आयोजित करना एक अच्छा संकेत है।
जसवंत सैनी जी ने कहा कि सावरकर का जीवन आज भी युवाओं और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। विनायक दामोदर सावरकर मात्र एक क्रांतिकारी, स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं बल्कि अच्छे लेखक, पत्रकार, विचारक, भाषाविद्, विज्ञाननिष्ठ विचारक, दूरदर्शी और महान रणनीतिकार थे। उन्होंने कहा कि अंग्रेज सावरकर से इतना डरते थे कि ब्रिटिश हुकूमत ने उनको दो उम्रकैद की सजा दी। सावरकर ने क्रान्तिकारियों को दबाने के लिए बनाई गई सेलुलर जेल से ११६ साल पहले ही कह दिया था कि ये ही अंडमान एक दिन भारत की रक्षा करने वाला श्रेष्ठ नेवल बेस बनेगा उनका ये कथन आज साकार हुआ।
सावरकर के विचार, दूरदृष्टि और रणनीति भारत को स्वर्णिम और सशक्त राष्ट्र बनाने में उल्लेखनीय योगदान देने में सक्षम है।
भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय सचिव एवं माय होम इंडिया के संस्थापक श्री सुनील देवधर जी ने हिंदू समाज का आत्मबोध जगाने के लिए सावरकर ने अभूतपूर्ण कार्य किए।
स्वतंत्रता से पहले खिलाफत आंदोलन में मुस्लिम लीग ने कांग्रेस को समर्थन देने के लिए ब्लैक मेल किया। खिलाफत आंदोलन विफल होने के बाद मुस्लिम लीग समर्थक मुस्लिमों ने दंगे किए और आरोपी अंग्रेज सरकार के बजाय हिंदुओं की हत्या, बलात्कार किया। वीर सावरकर इससे बहुत आहत हुए थे और हिंदुओं को सेना में शामिल होने पर जोर दिया।
वीर सावरकर इंग्लैंड गये ताकि शत्रु अंग्रेजों की रणनीति, सोच, शस्त्र शक्ति का आकलन कर सकें। उन्होंने इंग्लैंड से भारत को किताबों के बीच में बंदूकें , हथियार भेजते थे। उन्होंने बम बनाने की विधि सीखकर भारत के क्रांतिकारियों को भेज दी जिससे स्वतंत्रता क्रांति में धार पैदा हुई।
सुनील देवधर ने कहा कि सावरकर के राष्ट्रवादी चिंतन और राष्ट्रीय एकता के संदेश को समाज तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक के गौतमबुद्ध नगर के विभाग संघसंचालक सुशील, नोयडा महानगर संघचालक दिनेश गोयल जी, माय होम इंडिया दिल्ली एनसीआर के अध्यक्ष बलदेव राज सचदेव जी ने अपने विचार व्यक्त किया।
संस्था के मैनेजिंग ट्रस्टी अरुण पासी और नोएडा संयोजक नुमल दुसाद ने कार्यक्रम का संचालन प्रबंधन किया। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिष्ठित अतिथियों, समाजसेवियों, शिक्षाविदों, पत्रकारों, उद्यमियों एवं प्रबुद्ध नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। उपस्थित जनसमूह ने स्वातंत्र्यवीर सावरकर के विचारों और आदर्शों को आत्मसात कर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।
मीडिया संयोजक गिरीश पाण्डेय ने बताया कि माय होम इंडिया संस्था राष्ट्रीय एकता, अखंडता और बंधुत्व की भावना को सशक्त करने के लिए निरंतर कार्यरत है। संस्था विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत और शेष भारत के बीच सामाजिक एवं सांस्कृतिक समन्वय को मजबूत बनाने के उद्देश्य से अनेक जनकल्याणकारी कार्यक्रम संचालित करती रही है।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।





