
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानमंडल के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने महिला आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष पर “दोहरा रवैया” अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि संसद में विरोध और सदन में समर्थन दिखाकर जनता को भ्रमित किया जा रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “सपाइयों को देखकर गिरगिट भी शरमा जाए।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि 16 और 17 अप्रैल को लोकसभा में विपक्ष का रुख महिला विरोधी रहा, जिसकी झलक विधानसभा में भी देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि इस उम्र में सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए। योगी ने 2017 में “डबल इंजन सरकार” बनने के बाद डेढ़ साल में 2 करोड़ से अधिक शौचालय बनने का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी विपक्ष ने सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि जो दल अब महिला आरक्षण का समर्थन करने की बात कर रहे हैं, वही संसद में इसका विरोध कर चुके हैं। सपा विधायक पूजा पाल का जिक्र करते हुए उन्होंने विपक्ष पर महिलाओं के प्रति असंवेदनशील होने का आरोप लगाया।
कांग्रेस पर प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले महिलाओं को एलपीजी सिलेंडर के लिए संघर्ष करना पड़ता था, जबकि अब केंद्र सरकार ने 10 करोड़ से अधिक महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए हैं। उन्होंने जनधन योजना, शौचालय निर्माण और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं को सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया।
मुख्यमंत्री ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर संसद में विपक्ष के रुख की निंदा करते हुए प्रस्ताव भी पेश किया। उन्होंने कहा कि यदि समाजवादी पार्टी वास्तव में 33 प्रतिशत आरक्षण के पक्ष में है, तो उसे संसद में अपने आचरण की निंदा करनी चाहिए।
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए योगी ने कहा कि महिलाओं को गरिमा, सम्मान और स्वावलंबन मिल रहा है तथा नीति-निर्धारण में उनकी भागीदारी बढ़ रही है। उन्होंने शाहबानो प्रकरण का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष का इतिहास महिलाओं के आरक्षण में बाधा डालने वाला रहा है।
अंत में मुख्यमंत्री ने सभी सदस्यों से चर्चा में सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि यदि उनमें नैतिक साहस है तो वे स्पष्ट करें कि उन्होंने “नारी शक्ति वंदन” संशोधन विधेयक का विरोध क्यों किया। साथ ही कहा कि यदि उनके नेताओं से गलती हुई है तो उन्हें माफी मांगनी चाहिए और महिला-विरोधी आचरण की निंदा में भागीदार बनना चाहिए।





