
- रिपोर्ट: स्निग्धा श्रीवास्तव
अक्सर यह माना जाता है कि धूप वाले देशों में रहने वाले लोगों को पर्याप्त मात्रा में विटामिन D मिल जाता है, लेकिन हकीकत इससे अलग है। विशेषज्ञों के अनुसार लगभग हर चार में से एक वयस्क विटामिन D की कमी से जूझ रहा है। यही वजह है कि विटामिन D सप्लीमेंट्स आज सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले हेल्थ सप्लीमेंट्स में शामिल हो गए हैं।
विटामिन D एक फैट-सॉल्युबल विटामिन है, जो शरीर में हार्मोन की तरह काम करता है। शरीर की लगभग हर कोशिका में इसके रिसेप्टर्स पाए जाते हैं। विटामिन D3, जिसे कोलेकैल्सिफेरॉल कहा जाता है, इसका सबसे महत्वपूर्ण रूप माना जाता है। शरीर में पहुंचने के बाद यह लिवर और किडनी में बदलकर एक्टिव रूप कैल्सिट्रिऑल बनता है, जो शरीर के कई जरूरी कार्यों में मदद करता है।
शरीर सूर्य की अल्ट्रावॉयलेट-B (UVB) किरणों की मदद से खुद भी विटामिन D बना सकता है। इसके अलावा अंडे, ऑयली मछली और मशरूम जैसे खाद्य पदार्थों से भी यह मिलता है, लेकिन केवल खानपान से शरीर की जरूरत पूरी नहीं हो पाती।
विटामिन D का सबसे बड़ा काम शरीर में कैल्शियम के अवशोषण को बढ़ाना है, जिससे हड्डियां मजबूत बनी रहती हैं। इसकी कमी होने पर शरीर कैल्शियम को ठीक से अवशोषित नहीं कर पाता, जिससे हड्डियों से जुड़ी कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
बच्चों में इसकी गंभीर कमी से रिकेट्स जैसी बीमारी हो सकती है, जिसमें हड्डियां नरम हो जाती हैं और शरीर के विकास पर असर पड़ता है। वहीं वयस्कों में इसकी कमी ऑस्टियोमैलेशिया और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है, जिससे हड्डियां कमजोर होकर जल्दी टूटने लगती हैं। इसके अलावा मांसपेशियों में कमजोरी, ऐंठन और इम्यून सिस्टम कमजोर होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार धूप में कम समय बिताना विटामिन D की कमी की सबसे बड़ी वजह है। जो लोग ज्यादातर समय घर के अंदर रहते हैं, नाइट शिफ्ट में काम करते हैं या धूप से बचते हैं, उनमें इसकी कमी ज्यादा देखने को मिलती है। गहरी त्वचा वाले लोगों और गंभीर स्किन समस्याओं से पीड़ित लोगों में भी इसका खतरा अधिक रहता है।
बाजार में विटामिन D के कई सप्लीमेंट उपलब्ध हैं। लो-डोज़ सप्लीमेंट रोजाना लिए जाते हैं, जबकि हाई-डोज़ सप्लीमेंट सप्ताह में एक बार लेने की सलाह दी जाती है। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि बिना सलाह लंबे समय तक ज्यादा मात्रा में विटामिन D लेना नुकसानदायक हो सकता है। इससे शरीर में कैल्शियम का स्तर बढ़ सकता है, जिसके कारण उल्टी, कमजोरी, डिहाइड्रेशन और किडनी स्टोन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ज्यादातर लोगों को सप्ताह में कई बार सिर्फ 5 से 30 मिनट तक धूप में रहने से पर्याप्त विटामिन D मिल सकता है। अगर किसी को इसकी कमी की आशंका हो तो डॉक्टर की सलाह पर ब्लड टेस्ट कराना चाहिए और जरूरत पड़ने पर ही सप्लीमेंट लेना चाहिए।





