
- रिपोर्ट: प्राची सिंह
नई दिल्ली। दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल आंदोलन या विरोध प्रदर्शन होने भर से पुलिस लाठीचार्ज नहीं कर सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान पुलिस को संयम बरतना होगा और कार्रवाई पूरी तरह कानूनी दायरे में रहकर करनी होगी।
मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शनकारियों पर कथित अत्यधिक बल प्रयोग से संबंधित नई याचिकाओं का उल्लेख किया गया। इनमें छात्रों की ओर से दायर एक याचिका भी शामिल है, जिसमें प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया है।
28 जुलाई को होगी सभी याचिकाओं पर सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन सभी मामलों की सुनवाई मंगलवार, 28 जुलाई को की जाएगी। एक अन्य याचिका में बिहार के सीवान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ AK-47 राइफल के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया गया है।
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने मौखिक रूप से कहा कि प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। यदि कहीं पुलिस की ओर से आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया गया है तो उसे रोका जाना चाहिए और ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल होना आवश्यक है।
‘लोकतंत्र में आत्म-अनुशासन भी जरूरी’
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मामला केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिर्फ विरोध प्रदर्शन होने के आधार पर लाठीचार्ज उचित नहीं माना जा सकता।
सीजेआई ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में युवाओं को अपनी असहमति और विरोध शांतिपूर्ण ढंग से व्यक्त करने का पूरा अधिकार है। हालांकि, यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी भी प्रदर्शन का असामाजिक तत्व गलत फायदा न उठा सकें। अदालत ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में आत्म-अनुशासन और कानून के पालन की आवश्यकता पर भी जोर दिया।




