
- रिपोर्ट: प्राची सिंह
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान छात्र प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष के भारी हंगामे के बीच केंद्र सरकार ने लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश कर दिया। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन में यह विधेयक प्रस्तुत किया। विपक्षी सांसद दिल्ली में 20 जुलाई को प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से जवाब की मांग करते हुए लगातार नारेबाजी करते रहे।
हंगामे के बीच पेश हुआ विधेयक
लोकसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद जब दोपहर 12 बजे दोबारा शुरू हुई, तब भी विपक्ष का विरोध जारी रहा। शोर-शराबे के बीच आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखे गए और इसी दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 सदन में पेश किया।
ओम बिरला बोले- इस महत्वपूर्ण विधेयक पर होनी चाहिए व्यापक चर्चा
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय, कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी समेत अन्य सदस्यों से इस विधेयक पर अपनी राय रखने का आग्रह किया। हालांकि, विपक्षी सदस्यों ने हंगामे के कारण चर्चा में हिस्सा नहीं लिया।
ओम बिरला ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण विधेयक है और लंबे समय से सभी राजनीतिक दल इस विषय पर चर्चा की मांग कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए सभी दलों को मिलकर समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने विपक्ष से सदन की कार्यवाही में सहयोग करने और विधेयक पर चर्चा में भाग लेने की अपील की। लगातार हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई।
संशोधन विधेयक में क्या हैं प्रमुख प्रावधान?
प्रस्तावित संशोधन के तहत परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक करने, नकल कराने या अन्य अनुचित साधनों का उपयोग करने वालों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है।
मुख्य प्रस्ताव इस प्रकार हैं:
- प्रश्नपत्र लीक या अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर 5 से 10 वर्ष तक की कैद।
- दोषियों पर ₹50 लाख तक का जुर्माना।
- संगठित पेपर लीक गिरोह, संस्थान या माफिया के मामलों में कम से कम 7 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक की सजा तथा ₹10 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान।
- सभी पेपर लीक मामलों की 60 दिनों के भीतर जांच पूरी करना अनिवार्य होगा।
- चार्जशीट दाखिल होने के बाद 90 दिनों के भीतर ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य।
- राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का प्रस्ताव।
- पेपर लीक और परीक्षा माफिया की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) गठित करने का प्रावधान।
पेपर लीक पर सरकार की सख्ती
सरकार का कहना है कि इस संशोधन का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना, पेपर लीक माफिया पर प्रभावी कार्रवाई करना और लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। विधेयक पारित होने के बाद परीक्षा से जुड़े अपराधों पर पहले की तुलना में कहीं अधिक कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जा सकेगी।




