
New Delhi: दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे स्वयंभू संत आसाराम की याचिका पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने अदालत में अपनी विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में कहा गया है कि आसाराम को फिलहाल अस्पताल में भर्ती करने की तत्काल आवश्यकता नहीं है, लेकिन उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए 24 घंटे प्रशिक्षित केयरगिवर्स की निगरानी और देखभाल आवश्यक है।
एम्स रिपोर्ट में कई गंभीर बीमारियों का जिक्र
एम्स की मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, आसाराम कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि उन्हें कोरोनरी आर्टरी डिजीज (हृदय रोग), ऑस्टियोपोरोसिस, क्रॉनिक हाइपोनेट्रेमिया (शरीर में लंबे समय से सोडियम की कमी) और थैलेसीमिया जैसी स्वास्थ्य समस्याएं हैं। इसके अलावा उन्हें बार-बार पेट संबंधी दिक्कतें होती हैं और शरीर में खून की कमी भी पाई गई है।
सजा पर रोक की मांग, सुनवाई गुरुवार तक टली
आसाराम ने राजस्थान हाई कोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उनकी आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा गया था। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ ने मामले की सुनवाई की। हालांकि, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की अनुपलब्धता के कारण अदालत ने मामले की अगली सुनवाई गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी।
हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखी थी उम्रकैद
इससे पहले मई 2026 में राजस्थान हाई कोर्ट ने आसाराम को राहत देने से इनकार करते हुए उनकी उम्रकैद की सजा बरकरार रखी थी। हालांकि अदालत ने गैंगरेप से संबंधित आरोप हटाए थे, लेकिन दुष्कर्म मामले में दोषसिद्धि और आजीवन कारावास को यथावत रखते हुए उन्हें तत्काल सरेंडर करने का निर्देश दिया था।
2013 का है मामला
यह मामला वर्ष 2013 का है, जब उत्तर प्रदेश की एक नाबालिग छात्रा ने जोधपुर स्थित आश्रम में अपने साथ यौन शोषण का आरोप लगाया था। मामले की सुनवाई के बाद 25 अप्रैल 2018 को जोधपुर की विशेष पॉक्सो अदालत ने आसाराम को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। तब से यह मामला देश के चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल है।




