
नई दिल्ली। देश में कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए लगातार अभियान चलाए जाने के बावजूद भ्रूण के लिंग की अवैध जांच का कारोबार पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। संसद में पेश सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, हरियाणा में लिंग जांच से जुड़े मामले लगातार सामने आ रहे हैं। वर्ष 2025 में देशभर में दर्ज 83 मामलों में से 64 मामले अकेले हरियाणा के थे।
तीन साल में देश के आधे से ज्यादा मामले हरियाणा में
राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन के सवाल के जवाब में केंद्र सरकार की ओर से साझा आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 से 2025 के बीच देशभर में भ्रूण का लिंग बताने से जुड़े कुल 184 मामले दर्ज किए गए। इनमें 106 मामले हरियाणा के थे, जो कुल मामलों का करीब 57.6 प्रतिशत है।
इस अवधि में गुजरात में 28 और राजस्थान में 11 मामले दर्ज किए गए। वर्ष 2025 में देश में दर्ज 83 मामलों में से 64 मामले हरियाणा में सामने आए। आंकड़ों के आधार पर राज्य में औसतन लगभग हर छह दिन में एक मामला पकड़े जाने की स्थिति सामने आती है।
उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों तक पहुंचा अवैध नेटवर्क
रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा में स्वास्थ्य और पुलिस विभाग की कार्रवाई बढ़ने के बाद लिंग जांच से जुड़ी गतिविधियों के पड़ोसी राज्यों में फैलने की आशंका सामने आई है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में ऐसे मामलों पर निगरानी बढ़ाई गई है।
जनवरी 2024 से मार्च 2026 के बीच हरियाणा सरकार की ओर से 84 छापेमारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें 37 कार्रवाई उत्तर प्रदेश में की गईं। अमरोहा में मई में की गई एक कार्रवाई के दौरान एक गिरोह के सात सदस्यों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। पुलिस के अनुसार, गिरोह के पास पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन थी और हरियाणा के रोहतक से गर्भवती महिलाओं को कथित तौर पर लिंग जांच के लिए वहां लाया जाता था।
इसके अलावा सिरसा के डबवाली और करनाल के इंद्री में भी लिंग जांच के आरोप में डॉक्टरों और बिचौलियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है।
जन्म के समय लिंगानुपात भी चिंता का विषय
लिंग जांच और कन्या भ्रूण हत्या पर कार्रवाई के बावजूद हरियाणा में जन्म के समय लिंगानुपात को लेकर भी चिंता बनी हुई है। स्वास्थ्य मंत्रालय की सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में प्रति 1,000 लड़कों पर 891 लड़कियों का जन्म दर्ज किया गया है।
राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में जन्म के समय लिंगानुपात 923 था, जो 2026 के शुरुआती छह महीनों में घटकर 900 रह गया। चरखी दादरी में यह आंकड़ा 829 और महेंद्रगढ़ में 869 बताया गया है।
कार्रवाई के बावजूद चुनौती बरकरार
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वर्ष 2015 से अब तक हरियाणा में लिंग जांच और कन्या भ्रूण हत्या से जुड़े मामलों में 1,400 से अधिक एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इसके बावजूद सामने आ रहे नए मामलों से संकेत मिलता है कि अवैध लिंग जांच का नेटवर्क पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
विशेषज्ञों और अधिकारियों का मानना है कि ऐसे मामलों पर प्रभावी कार्रवाई के साथ-साथ सीमावर्ती जिलों में निगरानी, स्वास्थ्य केंद्रों की जांच और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना जरूरी है, ताकि भ्रूण के लिंग की अवैध जांच और कन्या भ्रूण हत्या पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।




