
इंदौर। इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी हत्याकांड में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है। राजा रघुवंशी की मां उमा रघुवंशी ने सोनम रघुवंशी के जमानत पर रिहा होने और मीडिया के सामने आने के बाद उसके व्यवहार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सोनम को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है और परिवार को अब भी न्याय का इंतजार है।
‘अगर सोनम निर्दोष होती तो मेरा बेटा आज जिंदा होता’
उमा रघुवंशी ने कहा कि सोनम पर लगे आरोप बेबुनियाद नहीं हैं। उनका कहना है कि यदि सोनम निर्दोष होती तो आज उनका बेटा राजा रघुवंशी उसके साथ होता।
उन्होंने कहा, “सोनम पर हत्या के आरोप यूं ही नहीं लगे हैं। हमें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है और हम अपने बेटे के लिए इंसाफ चाहते हैं।”
नेपाल भागने के आरोप और अदालत में पेशी पर उठाए सवाल
राजा रघुवंशी की मां ने कहा कि कई मौकों पर अदालत में पेशी का समय आया, लेकिन सोनम उपस्थित नहीं हुई। उनके अनुसार, इसी के बाद राजा ने उस पर नेपाल भागने के आरोप लगाए थे और उसके बाद ही वह सार्वजनिक रूप से सामने आई।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मामला लगातार लंबा खिंचता जा रहा है और जल्द सुनवाई होना जरूरी है।
ताबीज और परिवार की भूमिका पर भी लगाए आरोप
उमा रघुवंशी ने सोनम के गले में पहने गए लॉकेट और ताबीज को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि सोनम का परिवार तांत्रिक मान्यताओं में विश्वास करता है और उसी वजह से उसे ताबीज पहनाया गया।
उन्होंने कहा कि यदि ताबीज पहनाना ही था तो उसके गले में किसी के नाम का मंगलसूत्र क्यों पहनाया गया। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि सोनम के परिवार वाले उसकी मदद कर रहे हैं।
‘गोविंद ने न्याय का भरोसा दिया था, फिर बहन के पक्ष में क्यों खड़े हुए’
उमा रघुवंशी ने सोनम के भाई गोविंद पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने पहले परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा दिया था, लेकिन बाद में अपनी बहन के पक्ष में खड़े हो गए।
उन्होंने कहा कि आरोपों का सामना कर रही सोनम का जेल से बाहर होना भी उचित नहीं है और मामले में जल्द फैसला आना चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
पिछले वर्ष मई में राजा रघुवंशी अपनी पत्नी सोनम रघुवंशी के साथ हनीमून के लिए मेघालय गए थे। 23 मई को दोनों के लापता होने की सूचना सामने आई थी। इसके बाद 3 जून को एक गहरी खाई से राजा रघुवंशी का शव बरामद हुआ था। इस मामले में सोनम रघुवंशी पर अपने पति की हत्या का आरोप है और मामला न्यायालय में विचाराधीन है।




