
नई दिल्ली। फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा (Meta) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार के समक्ष अपने प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM), डीपफेक कंटेंट और कुछ परिचालन संबंधी चूकों को लेकर माफी व्यक्त की है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अवैध और हानिकारक सामग्री के प्रसार को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है।
रिपोर्टों के अनुसार, हाल ही में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और मेटा के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच एक अहम बैठक हुई। बैठक में सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बाल यौन शोषण सामग्री और डीपफेक जैसे कंटेंट को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने पर जोर दिया।
बैठक के दौरान सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई प्लेटफॉर्म अपने एल्गोरिदम के माध्यम से कंटेंट की पहुंच और प्रचार को प्रभावित करता है, तो उसकी जिम्मेदारी केवल एक मध्यस्थ (Intermediary) तक सीमित नहीं मानी जा सकती। इसी संदर्भ में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा को लेकर भी चर्चा हुई।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मार्क जुकरबर्ग ने अपने माफीनामे में प्लेटफॉर्म पर मौजूद आपत्तिजनक सामग्री और परिचालन संबंधी कमियों पर खेद जताया तथा भरोसा दिलाया कि कंपनी ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अपनी निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करेगी।
इस पूरे मामले ने तब गंभीर रूप लिया जब एक जांच में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बाल यौन शोषण सामग्री से जुड़े विज्ञापनों और कंटेंट के प्रसार के आरोप सामने आए। इसके बाद केंद्र सरकार ने मेटा से जवाब तलब किया था। मेटा ने पहले भी कहा है कि उसकी नीति बाल यौन शोषण सामग्री के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की है और ऐसे कंटेंट की पहचान कर उसे हटाने के लिए एआई और अन्य तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है





