
- रिपोर्ट: अमित कुमार
अयोध्या। प्रभु श्रीराम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर सियासत लगातार तेज होती जा रही है। इसी क्रम में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री पवन पांडे ने प्रेस वार्ता कर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और उसके पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। उनके साथ मंदिर के पंच प्रमुख हरिशंकर सफरीवाला भी मौजूद रहे, जिन्होंने मंदिर की जमीन, आभूषण और संपत्तियों के कथित गबन का आरोप लगाया।
हरिशंकर सफरीवाला ने दावा किया कि उनके मंदिर रामनिवास की लगभग 15-16 बिस्वा भूमि और अन्य जिलों में करीब 350 बीघा जमीन है। उनका आरोप है कि मंदिर के नामित पुजारी वीरेंद्र दास को कथित रूप से सेट कर मंदिर की संपत्ति का 5 करोड़ 80 लाख रुपये में बयाना कर कब्जा करा लिया गया। उन्होंने कहा कि वीरेंद्र दास को 60 लाख रुपये एडवांस दिए गए, जिसके बाद मंदिर, कार्यालय और भूमि पर कब्जा कर लिया गया तथा अन्य जिलों की जमीन कथित तौर पर प्रॉपर्टी डीलरों को सौंप दी गई।
हरिशंकर सफरीवाला ने यह भी आरोप लगाया कि भगवान श्रीराम की मूर्ति, सिंहासन, पूजन सामग्री और आभूषण सहित करीब 10 करोड़ रुपये मूल्य के गहने ले लिए गए। उन्होंने कहा कि उन्होंने कई बार इसकी रसीद मांगी, लेकिन आज तक कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया।
प्रेस वार्ता में पूर्व मंत्री पवन पांडे ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित ट्रस्ट 140 करोड़ भारतीयों के विश्वास पर खरा नहीं उतर सका। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट में बैठे लोग भगवान राम का नाम लेने के साथ-साथ मंदिर के चढ़ावे की कथित लूट को भी नहीं रोक सके।
पवन पांडे ने कहा कि यदि 5 तारीख को पहली बार कथित रूप से चोरी की रकम बरामद हुई थी, तो उसी समय एफआईआर क्यों दर्ज नहीं कराई गई। उनका आरोप था कि ट्रस्ट और उसके पदाधिकारियों ने पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि देश की जनता को यह बताया जाना चाहिए कि आखिर एफआईआर दर्ज करने में देरी क्यों हुई।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि कथित रूप से जिम्मेदार बड़े पदाधिकारियों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया गया। पवन पांडे ने ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों के नाम लेते हुए उनके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज करने और निष्पक्ष जांच की मांग की।
पूर्व मंत्री ने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इतने बड़े विवाद के बावजूद उनकी ओर से कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट की बैठक 11 जुलाई को इसलिए बुलाई गई ताकि कथित रूप से सबूतों को प्रभावित किया जा सके।
पवन पांडे ने ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों के कथित इस्तीफों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि इस्तीफा दिया गया है तो उसकी प्रति और इस्तीफे का कारण सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि पूरे मामले में पारदर्शिता बनी रहे।
उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि हाल में हुई छापेमारी केवल दिखावे के लिए की गई। उनके अनुसार, जब कथित तौर पर रकम बरामद हुई थी, उसी समय प्रभावी कार्रवाई की जानी चाहिए थी।
प्रेस वार्ता के दौरान पवन पांडे ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, ट्रस्ट के सभी संबंधित पदाधिकारियों से पूछताछ करने और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की।
नोट: प्रेस वार्ता में लगाए गए ये सभी आरोप पूर्व मंत्री पवन पांडे और मंदिर के पंच प्रमुख हरिशंकर सफरीवाला द्वारा लगाए गए हैं। इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया समाचार लिखे जाने तक सामने नहीं आई है।





