
Pankaj jha ✍️
वाराणसी। लखनऊ, उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। इसी बीच प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक बड़ी योजना की तैयारी की खबर सामने आई है, जिसे चुनाव से पहले सरकार का ‘मास्टर स्ट्रोक’ माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि सरकार महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आर्थिक सहायता देने की तैयारी में है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, चुनाव से पहले महिलाओं के खातों में 50 हजार रुपये तक की राशि दी जा सकती है। इसके बाद चुनाव के पश्चात 10-10 हजार रुपये की तीन किस्तों, यानी कुल 30 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता का प्रावधान बताया जा रहा है। इस तरह पात्र महिला को कुल 60 हजार से 1 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद मिलने की बात कही गई है।
मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार के फार्मूले की यूपी में दस्तक?
राजनीतिक जानकार इस संभावित योजना को मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार में महिला-केंद्रित योजनाओं के जरिए बने राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं। खास तौर पर महिला मतदाताओं को आर्थिक सहायता देने वाली योजनाओं ने इन राज्यों की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब उत्तर प्रदेश में भी महिला मतदाताओं पर फोकस बढ़ने की चर्चा तेज हो गई है।
महिला वोटर पर नजर, विपक्ष ने उठाए सवाल
योजना की चर्चा के साथ ही राजनीतिक बयानबाजी भी तेज होने की संभावना है। विपक्ष इसे चुनाव से पहले महिलाओं को आर्थिक लाभ देकर प्रभावित करने की कोशिश बता रहा है, जबकि सरकार की ओर से इसे महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाने वाली पहल के रूप में देखा जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में महिला मतदाताओं की बड़ी संख्या को देखते हुए 2027 के चुनाव में यह वर्ग बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में अगर सरकार की यह योजना वास्तविक रूप लेती है, तो इसका असर प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार का यह संभावित ‘मास्टर स्ट्रोक’ कब और किस रूप में जमीन पर उतरता है—और 2027 के चुनावी रण में महिला मतदाताओं का रुख किस ओर जाता है।




