
फर्रुखाबाद। आलू किसानों के लंबे संघर्ष और “आलू किसान बचाओ यात्रा” का असर आखिरकार दिखने लगा है। राजभवन लखनऊ तक अपनी आवाज पहुंचाने के बाद किसानों को बड़ी राहत मिली है। Farrukhabad की सातनपुर आलू मंडी में राज्य का पहला सरकारी आलू खरीद केंद्र खोल दिया गया, जिससे किसानों में उत्साह और नई उम्मीद जगी है।
इस पहल का उद्घाटन करने लखनऊ से उद्यान निदेशक वीपी राम और HAFED के प्रबंध निदेशक शैलेंद्र कुमार सुमन पहुंचे। उद्घाटन के दौरान मंडी परिसर में किसानों की भारी भीड़ उमड़ी, जिन्होंने इसे अपनी लड़ाई की पहली बड़ी जीत बताया।
कार्यक्रम में किसान नेता अशोक कटियार, आलू निर्यातक सुधीर शुक्ला, राजीव यादव ‘लालू’, पूर्व मंडी अध्यक्ष रिंकू वर्मा और मंडी सचिव सहित कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। इस मौके पर अधिकारियों ने किसानों का आभार व्यक्त किया।
किसानों ने बताया—यह सिर्फ शुरुआत
किसान नेता अशोक कटियार ने कहा कि यह कदम स्वागतयोग्य है, लेकिन स्थायी समाधान तब होगा जब जिले में आलू आधारित उद्योग स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिलता, तब तक “सड़क से संसद तक” संघर्ष जारी रहेगा।
हर साल उत्पादन, लेकिन नुकसान भी भारी
जानकारी के अनुसार, फर्रुखाबाद और आसपास के क्षेत्रों में हर साल लाखों टन आलू का उत्पादन होता है। इसके बावजूद भंडारण, प्रसंस्करण और उचित मूल्य की कमी के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। कई बार उन्हें लागत से भी कम कीमत पर फसल बेचनी पड़ती है, जिससे वे कर्ज के बोझ तले दब जाते हैं।
इस खरीद केंद्र के शुरू होने से उम्मीद जताई जा रही है कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसी सुविधा मिल सकेगी और बिचौलियों की भूमिका कम होगी। हालांकि, अब भी यह सवाल बना हुआ है कि क्या यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू होगी और क्या खरीद प्रक्रिया पारदर्शी व निरंतर बनी रहेगी।




