
मुंबई : Bombay High Court ने बुधवार को कॉमेडियन Bharti Singh और अभिनेता Shekhar Suman को बड़ी राहत देते हुए वर्ष 2010 में दर्ज एफआईआर को निरस्त करने का आदेश दिया है। अदालत ने साफ कहा कि हास्य-व्यंग्य और तुकबंदी के उद्देश्य से कही गई बातों का मकसद किसी समुदाय की भावनाओं को आहत करना नहीं होता।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उन शब्दों का जिक्र किया जिन्हें आपत्तिजनक बताया गया था—“या अल्लाह! रसगुल्ला! दही भल्ला!”। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि ये शब्द केवल हास्य और तुकबंदी के लिए इस्तेमाल किए गए थे और इनमें किसी तरह का धार्मिक अर्थ नहीं है।
अदालत ने माना कि “दही भल्ला” और “रसगुल्ला” जैसे खाद्य पदार्थ आम सामाजिक उपयोग में तटस्थ हैं और इन्हें किसी विशेष धर्म से जोड़ना उचित नहीं है। कोर्ट ने कहा कि किसी हास्य कार्यक्रम में इन शब्दों का प्रयोग अपने आप में धर्म का अपमान नहीं माना जा सकता, जब तक यह साबित न हो कि इन्हें जानबूझकर अपमान के उद्देश्य से इस्तेमाल किया गया।
कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि कलाकारों को निशाना बनाना आसान हो गया है, लेकिन आपराधिक कानून का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। यह कार्यक्रम एक पारिवारिक मनोरंजन शो था, जहां कलाकारों और जजों का उद्देश्य केवल लोगों को हंसाना होता है।
अदालत ने कहा कि मंच पर प्रदर्शन करने वाले कलाकार आमतौर पर तय स्क्रिप्ट के अनुसार काम करते हैं और उपलब्ध साक्ष्यों से यह साबित नहीं होता कि विवादित संवाद याचिकाकर्ताओं ने खुद लिखे थे। उनकी भूमिका सीमित थी और उन पर लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया साबित नहीं होते।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब शिकायत में जरूरी तथ्यों का अभाव हो और अपराध सिद्ध न हो, तो ऐसी आपराधिक कार्यवाही जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। इसी आधार पर अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 295-ए और 34 के तहत पायधोनी पुलिस स्टेशन में 27 नवंबर 2010 को दर्ज एफआईआर और उससे जुड़ी सभी कार्यवाहियों को रद्द करने का आदेश दिया।





