
- रिपोर्ट: अमित कुमार
रामनगरी अयोध्या के प्रसिद्ध गुप्तार घाट पर चल रहे करोड़ों रुपये के सौंदर्यीकरण कार्य में गंभीर लापरवाही सामने आई है। तीर्थ विकास परिषद और यूपीपीसीएल की देखरेख में 3 करोड़ 67 लाख रुपये की लागत से प्रभात कंस्ट्रक्शन द्वारा घाट पर पत्थर लगाने एवं सौंदर्यीकरण का कार्य कराया जा रहा है। लेकिन स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान निकला पत्थरों का स्क्रैप और मलबा सीधे सरयू घाट पर फेंक दिया गया, जिससे श्रद्धालुओं की जान जोखिम में पड़ गई है।
वही स्थानीय निवासियों का आरोप लगाते हुए कहना है कि घाट पर जगह-जगह पड़े पत्थरों के टुकड़ों के कारण कई श्रद्धालु स्नान के दौरान फिसलकर गिर चुके हैं और चोटिल हुए हैं। लोगों का आरोप है कि उन्होंने कई बार कार्यदायी संस्था को इसकी जानकारी दी, लेकिन शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया गया और मलबा वहीं पड़ा रहा।

अब सरयू नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से स्थिति और भी खतरनाक हो गई है। नदी का पानी बढ़ने के कारण पत्थरों का मलबा पानी के अंदर छिप गया है। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को यह अंदाजा भी नहीं है कि पानी के भीतर कहां-कहां पत्थरों के नुकीले टुकड़े पड़े हैं। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि किसी श्रद्धालु की जान चली गई या कोई बड़ा हादसा हो गया, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है।
वहीं, यूपीपीसीएल के अधिकारी मनोज शर्मा ने बताया कि गुप्तार घाट पर 3.67 करोड़ रुपये की योजना के तहत सौंदर्यीकरण का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि कार्य में लापरवाही की शिकायत मिली है, जिसके बाद तत्काल संबंधित जेई को मौके पर भेजकर पत्थरों का मलबा हटाने और घाट की सफाई कराने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, या फिर समय रहते घाट से मलबा हटाकर श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी? सरयू में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु स्नान करने पहुंचते हैं। ऐसे में घाट की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब कौन देगा।





