
- रिपोर्ट: प्राची सिंह
New Delhi: भारतीय रेलवे की प्रीमियम ट्रेनों में शामिल वंदे भारत एक्सप्रेस अपनी तेज रफ्तार और आधुनिक तकनीक के लिए जानी जाती है। अब इसकी एक और तकनीकी खासियत चर्चा में है। ट्रेन में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें ब्रेक लगाने के दौरान इलेक्ट्रिक मोटर जनरेटर की तरह काम कर सकती है और ट्रेन की गतिज ऊर्जा का एक हिस्सा दोबारा विद्युत ऊर्जा में बदला जा सकता है।
ब्रेक लगाते ही मोटर बन जाती है जनरेटर
वंदे भारत में इलेक्ट्रिक मोटर ट्रेन को चलाने के साथ ब्रेकिंग के दौरान ऊर्जा वापस हासिल करने में भी भूमिका निभा सकती है। जब तेज रफ्तार ट्रेन पर ब्रेक लगाया जाता है तो पहियों की गति मोटर को घुमाती है। इस दौरान मोटर जनरेटर की तरह काम कर सकती है और बिजली उत्पन्न होती है।
इसे रीजेनरेटिव ब्रेकिंग (Regenerative Braking) कहा जाता है। सामान्य ब्रेकिंग में ट्रेन की गतिज ऊर्जा का बड़ा हिस्सा गर्मी के रूप में नष्ट हो जाता है, जबकि रीजेनरेटिव ब्रेकिंग में ऊर्जा के एक हिस्से को वापस उपयोगी विद्युत ऊर्जा में बदला जा सकता है।
वंदे भारत का ब्रेकिंग सिस्टम क्यों है खास?
वंदे भारत में आधुनिक इलेक्ट्रो-प्न्यूमेटिक डिस्क ब्रेकिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। यह सिस्टम इलेक्ट्रिकल सिग्नल और न्यूमैटिक व्यवस्था के जरिए ब्रेकिंग को तेजी से नियंत्रित करता है।
डिस्क ब्रेक की कार्यप्रणाली कुछ हद तक कारों में इस्तेमाल होने वाले डिस्क ब्रेक जैसी होती है। ब्रेक डिस्क पर दबाव डालकर ट्रेन की गति कम की जाती है। तेज रफ्तार वाली ट्रेन में इस तरह की प्रभावी ब्रेकिंग प्रणाली सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।
इमरजेंसी में भी तेजी से रोकने की क्षमता
वंदे भारत में आपात स्थिति के दौरान ट्रेन को नियंत्रित तरीके से रोकने के लिए आधुनिक ब्रेकिंग तकनीक मौजूद है। तेज गति से चल रही ट्रेन को कम दूरी में सुरक्षित रूप से रोकना रेलवे के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा पहलू है।
इमरजेंसी ब्रेकिंग से जुड़ी तकनीकों के परीक्षण भी किए गए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर ट्रेन को प्रभावी तरीके से नियंत्रित किया जा सके।
ब्रेक लगाने पर कैसे बनती है बिजली?
जब ट्रेन चलती है तो उसमें काफी गतिज ऊर्जा मौजूद होती है। पारंपरिक ब्रेक लगाने पर इस ऊर्जा का अधिकांश हिस्सा घर्षण के कारण गर्मी में बदल जाता है।
रीजेनरेटिव ब्रेकिंग में स्थिति अलग होती है। ब्रेकिंग के दौरान ट्रेन के पहिए इलेक्ट्रिक मोटर को घुमाते हैं। मोटर जनरेटर के रूप में काम करती है और यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलती है। इस तरह ऊर्जा का एक हिस्सा दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है।
कितनी ऊर्जा वापस हासिल हो सकती है?
ब्रेक लगाने पर हर बार समान मात्रा में बिजली पैदा नहीं होती। यह ट्रेन की गति, ब्रेकिंग की स्थिति, मोटर की क्षमता और उस समय बिजली प्रणाली की जरूरत जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रीजेनरेटिव ब्रेकिंग के जरिए करीब 30 प्रतिशत तक ऊर्जा वापस हासिल करने का अनुमान बताया गया है। हालांकि वास्तविक मात्रा परिचालन परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे ऊर्जा की बर्बादी कम की जा सकती है और ट्रेन के संचालन को अधिक ऊर्जा-कुशल बनाने में मदद मिलती है।




