
- जनता की आवाज पंकज झां✍️
वाराणसी। काशीराज काली मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने मंदिर परिसर एवं उसके मार्गों पर कथित अतिक्रमण को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। इस संबंध में माननीय जिला अधिकारी महोदय से मांग की गई है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच कराकर मंदिर परिसर और उससे जुड़े मार्गों को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।
श्रद्धालुओं का कहना है कि काशीराज काली मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि काशी की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह एक हेरिटेज धरोहर है, जिसकी सुरक्षा और संरक्षण प्रशासन तथा समाज दोनों की जिम्मेदारी है। आरोप है कि कुछ लोगों द्वारा मंदिर से जुड़े क्षेत्रों का निजी व्यावसायिक लाभ के लिए उपयोग किया जा रहा है तथा बिना किसी वैधानिक अनुमति के स्थानों पर कब्जे जैसी स्थिति उत्पन्न की जा रही है।
मंदिर से जुड़े लोगों का यह भी कहना है कि मंदिर के पिछले द्वार के आसपास ऐसी गतिविधियां हो रही हैं, जिनसे वहां रहने वाले पुजारी परिवारों और मंदिर सेवकों के आवागमन में बाधा उत्पन्न होती है। उनका आरोप है कि इस प्रकार की परिस्थितियां मंदिर के धार्मिक वातावरण और व्यवस्था को प्रभावित कर रही हैं।

श्रद्धालुओं ने प्रश्न उठाया है कि यदि शासन-प्रशासन द्वारा नियम, कानून और सुशासन की बात की जाती है, तो फिर हेरिटेज संपत्तियों और धार्मिक धरोहरों से जुड़े मामलों में नियमों का समान रूप से पालन क्यों नहीं सुनिश्चित किया जाता। उनका कहना है कि कानून का उद्देश्य केवल नियम मानने वालों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध भी आवश्यक कार्रवाई होनी चाहिए।
स्थानीय लोगों की मांग है कि मंदिर की भूमि, मार्ग, प्रवेश-द्वार और उससे जुड़े सभी क्षेत्रों का राजस्व एवं प्रशासनिक अभिलेखों के आधार पर सत्यापन कराया जाए। यदि कहीं भी अवैध कब्जा, अतिक्रमण अथवा बिना अनुमति व्यावसायिक उपयोग पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उसे तत्काल हटाया जाए।
श्रद्धालुओं का कहना है कि काशी की ऐतिहासिक धरोहरें किसी व्यक्ति विशेष की निजी संपत्ति नहीं हैं। उनका संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए आवश्यक है। इसलिए काशीराज काली मंदिर की गरिमा, पवित्रता और ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन को शीघ्र एवं प्रभावी कदम उठाने चाहिए।




