
New Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार ने भगोड़े अपराधियों के खिलाफ सख्त अभियान चलाते हुए वर्ष 2019 से अब तक 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाने में सफलता हासिल की है। सरकार का कहना है कि यह अभियान कानून-व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक अपराधों पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है।
सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (Fugitive Economic Offenders Act)’ लागू किया गया, जबकि गृह मंत्रालय ने खुफिया जानकारी, आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर आधारित एकीकृत प्रणाली विकसित कर प्रत्यर्पण प्रक्रिया को तेज किया।
2014 से पहले की चुनौतियां
सरकारी जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2014 से पहले भारत के पास केवल 37 देशों के साथ प्रत्यर्पण संधियां थीं और आर्थिक भगोड़ों की संपत्ति जब्त करने के लिए अलग कानून भी उपलब्ध नहीं था। वर्ष 2004 से 2013 के बीच औसतन केवल चार भगोड़ों का ही प्रति वर्ष प्रत्यर्पण हो पाता था, जबकि बड़ी संख्या में अनुरोध लंबित रहते थे। अधूरे दस्तावेज, कानूनी जटिलताओं और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी के कारण प्रक्रिया काफी धीमी थी।
प्रत्यर्पण को मिली राष्ट्रीय प्राथमिकता
सरकार ने दावा किया कि मोदी सरकार ने भगोड़ों की वापसी को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाते हुए वैश्विक अभियान, एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय और प्रभावी कूटनीति पर विशेष जोर दिया। इसके तहत एनआईए संशोधन अधिनियम, यूएपीए संशोधन अधिनियम और वर्ष 2024 में लागू नए आपराधिक कानूनों में भगोड़ों के खिलाफ विशेष प्रावधान किए गए।
सरकार ने बताया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 355 और 356 के तहत पहली बार ‘ट्रायल इन एब्सेंटिया’ (अनुपस्थिति में सुनवाई) का प्रावधान जोड़ा गया है, जिससे भगोड़े अपराधियों की गैरमौजूदगी में भी मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी।
BHARATPOL और इंटरपोल सहयोग से तेज हुई कार्रवाई
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वर्ष 2025 में ‘BHARATPOL’ प्लेटफॉर्म लॉन्च किया, जिसके माध्यम से सीबीआई, राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान तेज हुआ। वर्तमान में 1,400 से अधिक एजेंसियां इस नेटवर्क से जुड़ी हैं, जिससे जांच और प्रत्यर्पण से जुड़ी सूचनाओं के आदान-प्रदान में उल्लेखनीय तेजी आई है।
इसके साथ ही इंटरपोल के सहयोग से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने और भगोड़ों की डिजिटल ट्रैकिंग को भी मजबूत किया गया। सरकार के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में 401 रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए हैं।
17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त
सरकार के अनुसार, PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून) के सख्त क्रियान्वयन के तहत वर्ष 2019 से 2026 के बीच भगोड़े आर्थिक अपराधियों की 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई, जबकि 18,762 करोड़ रुपये की राशि की सफल रिकवरी (Restitution) भी की गई।
किन मामलों के आरोपी लाए गए वापस
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत वापस लाए गए 274 भगोड़ों में आर्थिक अपराध, आतंकवाद, संगठित अपराध, हत्या, डकैती, यौन अपराध, पॉक्सो, मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, साइबर अपराध और जाली मुद्रा जैसे मामलों के आरोपी शामिल हैं।
एजेंसियों के समन्वय पर जोर
सरकार का कहना है कि इस अभियान की सफलता में आईबी, सीबीआई, एनआईए, ईडी, रॉ, विदेश मंत्रालय, एनसीबी, डीजीजीआई और राज्य पुलिस सहित कई एजेंसियों की संयुक्त भूमिका रही है। जनवरी 2026 में आईबी के मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) के तहत गठित स्टैंडिंग फोकस ग्रुप भी भगोड़ों की पहचान, डोजियर तैयार करने और विदेशी एजेंसियों के साथ समन्वय में अहम भूमिका निभा रहा है।
सरकार ने कहा कि विदेशों में छिपे भगोड़े केवल फरार आरोपी नहीं, बल्कि कई मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा और संगठित अपराध के लिए सक्रिय खतरा बने हुए हैं। ऐसे में उनके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को भविष्य में भी मिशन मोड में जारी रखा जाएगा।




