
- रिपोर्ट: अजय सोनकर
वाराणसी/जौनपुर: पूर्वांचल के अपराध जगत का एक ऐसा नाम, जिसने करीब चार दशकों तक पुलिस, राजनीति और अंडरवर्ल्ड के बीच दहशत की अलग ही इबारत लिखी। एक ऐसा गैंगस्टर, जिसे 1998 में दिल्ली के समयपुर बादली एनकाउंटर में 11 गोलियां लगीं, लेकिन मौत उसे छू भी नहीं सकी। मगर वक्त का पहिया ऐसा घूमा कि जिस अपराध की दुनिया पर उसने राज किया, उसी दुनिया ने 9 जुलाई 2018 को बागपत जेल के भीतर उसकी जिंदगी का आखिरी अध्याय लिख दिया।
यह कहानी है मुन्ना बजरंगी उर्फ प्रेम प्रकाश सिंह की, जिसके नाम से कभी पूर्वांचल कांपता था।
गरीब किसान का बेटा… जो बन गया पूर्वांचल का सबसे खौफनाक डॉन
1967 में जौनपुर के पूरेदयाल गांव में जन्मा प्रेम प्रकाश सिंह एक साधारण किसान परिवार का बेटा था। पिता चाहते थे कि बेटा पढ़-लिखकर अच्छा इंसान बने, लेकिन पांचवीं के बाद पढ़ाई छूट गई। कुश्ती, हथियार और फिल्मों के गैंगस्टरों का जुनून उसे अपराध की दुनिया की ओर खींच ले गया।
महज किशोर उम्र में चाचा के अपमान का बदला लेने के लिए उसने 250 रुपये का देसी कट्टा खरीदा और पहली हत्या कर दी। यहीं से प्रेम प्रकाश, मुन्ना बजरंगी बन गया।
पहला मुकदमा… फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा
17 साल की उम्र में हत्या और डकैती का पहला मुकदमा दर्ज हुआ। इसके बाद स्थानीय अपराधियों के साथ जुड़ते-जुड़ते वह पूर्वांचल के बड़े माफिया नेटवर्क तक पहुंच गया। 1990 के दशक में उसकी मुलाकात मुख्तार अंसारी से हुई और यहीं से उसकी अपराध की दुनिया में असली उड़ान शुरू हुई।
सरकारी ठेकों से लेकर रंगदारी और राजनीतिक हत्याओं तक, उसका नाम हर बड़े अपराध में गूंजने लगा।
AK-47 की गोलियों से दहल उठा था पूर्वांचल
1993 से 2005 के बीच मुन्ना बजरंगी पर कई चर्चित हत्याओं का आरोप लगा। लेकिन 2005 में भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया। बताया गया कि इस हमले में AK-47 से सैकड़ों गोलियां चलाई गईं और इसके बाद मुन्ना देश के सबसे वांछित अपराधियों में शामिल हो गया।
11 गोलियां लगीं… फिर भी मौत हार गई
1998 में दिल्ली के समयपुर बादली इलाके में यूपी और दिल्ली पुलिस के संयुक्त अभियान में मुन्ना बजरंगी पुलिस के घेरे में आ गया। भीषण मुठभेड़ में उसके शरीर में 11 गोलियां धंस गईं।
पुलिस ने उसे मृत समझ लिया, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने पाया कि उसकी सांसें अभी चल रही थीं। यह घटना उसे अपराध जगत में लगभग “अमर” जैसी पहचान दिला गई।
जेल में बैठकर भी चलता रहा साम्राज्य
2009 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उसे मुंबई से गिरफ्तार किया। जेल पहुंचने के बाद भी उसका नेटवर्क खत्म नहीं हुआ। रंगदारी, धमकी और गैंग संचालन के आरोप लगातार उससे जुड़े रहे। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ हत्या, रंगदारी, अपहरण और गैंगस्टर एक्ट समेत कई गंभीर मामले दर्ज थे।
जिस दुनिया पर राज किया… उसी ने कर दिया खत्म
9 जुलाई 2018…बागपत जेल की हाई सिक्योरिटी बैरक गोलियों की आवाज से गूंज उठी। साथी कैदी सुनील राठी ने मुन्ना बजरंगी पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। जेल के भीतर हुई इस सनसनीखेज हत्या ने पूरे देश को हिला दिया।
सबसे बड़ा सवाल आज भी वही है—
आखिर हाई सिक्योरिटी जेल के भीतर हथियार पहुंचे कैसे?
चार दशक की दहशत… और आखिर में अंधेरा
मुन्ना बजरंगी की कहानी सिर्फ एक गैंगस्टर की कहानी नहीं, बल्कि इस बात का उदाहरण भी है कि अपराध की दुनिया में चाहे कोई कितना भी ताकतवर क्यों न बन जाए, उसका अंत अक्सर हिंसा, विश्वासघात और अंधेरे में ही होता है।
11 गोलियां उसे नहीं मार सकीं… लेकिन जिस जरायम की दुनिया पर उसने वर्षों तक राज किया, उसी दुनिया ने आखिरकार उसकी सांसें छीन लीं।





