
- रिपोर्ट: अनुराग सिंह बिष्ट
लखनऊ। अलीगंज की पावन धरा पर, जहाँ सेक्टर-डी के भूखंड संख्या-एम0एस0-102 पर एक व्यावसायिक इमारत का ढांचा खड़ा था, आज वहां मातम का सन्नाटा है। 15 जिंदगियां राख में तब्दील हो गईं, और पीछे छूट गई एक ऐसी कहानी, जिसमें नियमों को ताक पर रखकर अवैध को वैध बनाने की कला का भरपूर प्रदर्शन किया गया।
अब प्रशासन जागा है। SIT विशेष जांच दल, बनी है, सूचियां बन रही हैं, और बड़े-बड़े अधिकारियों के नाम फाइलों में दर्ज हो रहे हैं। 2016 से 2024 तक जिस किसी ने भी वहां की धूल चखी है, सब रडार पर हैं। पूर्व उपाध्यक्षों से लेकर छोटे-मोटे बाबुओं तक, सबकी भूमिका की जांच होगी। पर सवाल यह है कि क्या यह जांच किसी नतीजे तक पहुंचेगी, या फिर यह धृतराष्ट्र की भूमिका निभाने वाले तंत्र का एक नया प्रहसन मात्र है?
लखनऊ विकास प्राधिकरण ने नोटिस चस्पा कर दिया है, 15 दिन का समय! या तो खुद गिरवा लो, वरना हमारा लोहे का पंजे वाला साथी बुलडोजर आएगा। परंतु, यह तो बस एक शुरुआत है। निर्माण करने वाले भी इस खेल के माहिर खिलाड़ी हैं। नियम और कानून के पन्नों में झांकें, तो मंडलायुक्त के कार्यालय का दरवाजा अभी खुला है।
अपील की जाएगी, दलीलें दी जाएंगी, और फिर शुरू होगा रोक (स्टे) की तलाश में कानूनी दांव-पेंचों का वह अंतहीन सफर, जो वर्षों तक फाइलों को धूल फांकने पर मजबूर कर देता है। क्या एलडीए के पास इतनी कुव्वत है कि वह रसूखदारों के इन कानूनी जाल को तोड़ सके? या फिर यह 15 दिन की मोहलत सिर्फ एक नाटक है, जो आने वाले समय में एक लंबी कानूनी जंग में तब्दील हो जाएगा?
अधिकारियों का अपना राग है, सिर्फ तैनाती के आधार पर नाम भेजना उचित नहीं, वाकई, यह अजीब तर्क है! जब इमारत की नींव में ईंटें रखी जा रही थीं, तब क्या वे सब निद्रासन में थे? अब जब आग लग चुकी है और लाशें बिछ चुकी हैं, तब जवाबदेही तय करने का खेल खेला जा रहा है।
अपर मुख्य सचिव और एडीजी जोन की निगरानी में चल रही यह जांच, क्या वाकई दोषी को बेनकाब करेगी? या फिर यह पूरी कवायद सिर्फ कागजों पर न्याय का स्वांग रचकर शांत हो जाएगी?
आने वाला वक्त ही यह बताएगा कि क्या वाकई अलीगंज में वह बुलडोजर चलेगा, जिसने नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए अट्टालिकाएं खड़ी कीं, या फिर कानून की यह पेचीदा गलियां फिर एक बार अवैध को संरक्षण दे देंगी। फिलहाल तो लखनऊ का आम जनमानस, राख के ढेरों के बीच न्याय की उस लौ को टकटकी लगाए देख रहा है!




