
मनमानी फीस वसूली पर सख्ती, डीएम की अध्यक्षता में बैठक स्कूलों को कड़े निर्देश जारी
प्रतापगढ़
जनपद में निजी/स्ववित्तपोषित विद्यालयों द्वारा फीस वृद्धि और अतिरिक्त शुल्क वसूली को लेकर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। मंगलवार (13 अप्रैल 2026) को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में सभी स्ववित्तपोषित विद्यालयों के प्रबंधकों/प्रधानाचार्यों को सख्त निर्देश जारी किए गए।
बैठक में स्पष्ट किया गया कि उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2018 का कड़ाई से पालन अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
फीस वृद्धि पर सख्त नियम
विद्यालय केवल निर्धारित सीमा के भीतर ही वार्षिक फीस बढ़ा सकते हैं।
बिना उचित औचित्य और अभिलेखों के फीस वृद्धि नहीं की जाएगी।
सभी स्कूलों को अपनी फीस संरचना पारदर्शी बनानी होगी और वेबसाइट/सूचना पट पर सार्वजनिक करनी होगी।
बैठक में अभिभावकों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कई अहम फैसले लिए गए
कैपिटेशन फीस (डोनेशन) वसूली पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।
शैक्षणिक सत्र के दौरान बार-बार फीस वृद्धि नहीं की जा सकेगी।
बिना अनुमति तय सीमा से अधिक शुल्क लेना अवैध माना जाएगा।
किसी विशेष दुकान से किताब, जूते, मोजे या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा।
शिकायतों के निस्तारण के लिए समिति सक्रिय रहेगी।
नियम तोड़ने वाले विद्यालयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान बताया गया
पहली बार उल्लंघन पर अधिक शुल्क वापसी के साथ 1 लाख रुपये तक जुर्माना।
दूसरी बार उल्लंघन पर 5 लाख रुपये तक जुर्माना।
लगातार उल्लंघन की स्थिति में विद्यालय की मान्यता/संबद्धता तक समाप्त की जा सकती है।
अन्य महत्वपूर्ण निर्देश
बिना जिला शुल्क नियामक समिति की अनुमति के 5 वर्ष तक फीस में बदलाव नहीं किया जा सकेगा।
अधिनियम के तहत मिलने वाली सुविधाओं का सही उपयोग सुनिश्चित करना होगा।
वेतन आयोग लागू होने की स्थिति में ही सीमित फीस वृद्धि की अनुमति होगी।
सभी विद्यालयों को 2018 अधिनियम का अक्षरश पालन करना अनिवार्य होगा।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि “मनमानी फीस वसूली किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी”।
वहीं जिला विद्यालय निरीक्षक ने चेतावनी दी कि यदि किसी विद्यालय ने नियमों का उल्लंघन किया तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस फैसले से अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से निजी स्कूलों की मनमानी फीस और अतिरिक्त शुल्क वसूली से परेशान थे।





