
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे से रोजाना लाखों यात्री सफर करते हैं। सफर के दौरान ट्रेन में मिलने वाले खाने की गुणवत्ता को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं। खासकर रोटी के कड़े होने और चावल की गुणवत्ता को लेकर यात्री शिकायत करते रहे हैं। ऐसे में यह जानना दिलचस्प है कि रेलवे की पेंट्री कारों में खाना तैयार करने के लिए किस तरह के आटा और चावल का इस्तेमाल किया जाता है।
इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) की ओर से जारी कैटरिंग संबंधी दिशा-निर्देशों और अनुमोदित ब्रांड्स की सूची में खाद्य सामग्री के लिए निर्धारित ब्रांड्स का उल्लेख किया गया है।
आटे और सूजी के लिए कई ब्रांड्स को मंजूरी
IRCTC की स्वीकृत ब्रांड सूची के अनुसार आटा, मैदा, बेसन और सूजी की श्रेणी में कई प्रमुख ब्रांड्स शामिल हैं। इनमें आशीर्वाद, पिल्सबरी, शक्तिभोग, फॉर्च्यून, नेचर फ्रेश, फार्म फ्रेश, राजधानी, आहार और अन्नपूर्णा जैसे ब्रांड्स के नाम बताए गए हैं।
कैटरिंग व्यवस्था से जुड़े वेंडर्स और ठेकेदारों को निर्धारित मानकों के अनुरूप अनुमोदित खाद्य सामग्री का इस्तेमाल करना होता है। इसका उद्देश्य भोजन की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा के मानकों को बनाए रखना है।
वंदे भारत, राजधानी और शताब्दी में बासमती चावल
ट्रेनों में परोसे जाने वाले चावल के लिए भी कैटरिंग व्यवस्था में अलग-अलग मानक निर्धारित हैं। उपलब्ध दिशा-निर्देशों के मुताबिक वंदे भारत, राजधानी और शताब्दी जैसी प्रीपेड ट्रेनों में प्रीमियम श्रेणी के बासमती चावल के इस्तेमाल का प्रावधान है।
वहीं, अन्य मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले चावल के इस्तेमाल की व्यवस्था है। चावल की श्रेणी में इंडिया गेट, कोहिनूर, दावत, टिल्डा, श्री लाल महल, लाल किला, देवाया, एयरोप्लेन और फॉर्च्यून जैसे ब्रांड्स सूची में शामिल बताए गए हैं।
पेंट्री कारों में गुणवत्ता की निगरानी
रेलवे और IRCTC की कैटरिंग व्यवस्था में खाद्य गुणवत्ता की निगरानी के लिए निरीक्षण और सैंपलिंग की व्यवस्था है। कैटरिंग वेंडर्स को निर्धारित खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों का पालन करना होता है।
यदि निरीक्षण के दौरान नियमों का उल्लंघन या निर्धारित मानकों के विपरीत सामग्री के इस्तेमाल की पुष्टि होती है, तो संबंधित कैटरिंग एजेंसी के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसमें जुर्माना लगाने से लेकर लाइसेंस संबंधी कार्रवाई तक के प्रावधान शामिल हो सकते हैं।
इस तरह ट्रेन में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता केवल खाना बनाने की प्रक्रिया पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इस्तेमाल होने वाली खाद्य सामग्री, कैटरिंग मानकों और नियमित निगरानी की पूरी व्यवस्था से जुड़ी होती है।




