
- रिपोर्ट: प्राची सिंह
नई दिल्ली। अयोध्या के राम मंदिर में दान चोरी के मामले में पहली बार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरी ने स्वीकार किया है कि मंदिर से करीब 3 करोड़ रुपये की चोरी हुई है। हालांकि, उन्होंने मंदिर से 14 करोड़ रुपये के सोना, चांदी और अन्य कीमती सामान चोरी होने की खबरों को पूरी तरह निराधार और भ्रामक बताया।
गोविंददेव गिरी ने कहा कि अब तक चोरी की रकम को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं, जबकि एसआईटी की प्रारंभिक जांच में लगभग 80 लाख रुपये की बरामदगी का उल्लेख किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की जांच जारी है और तथ्य सामने आने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
इस्तीफे की अटकलों को किया खारिज
पुणे दौरे के दौरान गोविंददेव गिरी ने अपने इस्तीफे की चर्चाओं को सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने न तो इस्तीफा दिया है और न ही ऐसा कोई विचार उनके मन में है। उन्होंने कहा कि वह छत्रपति शिवाजी महाराज के अनुयायी हैं और कठिन परिस्थितियों से घबराकर पीछे हटने वालों में नहीं हैं।
चंपत राय ने स्वेच्छा से छोड़ा पद
ट्रस्ट के महासचिव पद से चंपत राय के इस्तीफे को लेकर उठे सवालों पर भी गोविंददेव गिरी ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि चंपत राय को किसी प्रकार का “बलि का बकरा” नहीं बनाया गया। उनके अनुसार, चंपत राय ने व्यवस्था में हुई कुछ लापरवाही की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए स्वयं अपने पद से इस्तीफा देने का निर्णय लिया।
SIT जांच पर जताया भरोसा
गोविंददेव गिरी ने कहा कि उन्हें एसआईटी की जांच पर पूरा विश्वास है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों पर किसी प्रकार का दबाव नहीं है और मामले को दबाने की कोई कोशिश नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह अपराध सीधे रामलला की आस्था से जुड़ा है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे कानून के अनुसार कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
उन्होंने अपनी सादगी का उल्लेख करते हुए कहा कि वह आज भी पुणे में एक छोटे से एक कमरे और रसोई वाले घर में रहते हैं और उस मकान की एक ईंट तक उनके नाम पर नहीं है।





