
बेंगलुरु : कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर सत्ता परिवर्तन की चर्चाएं तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच लंबे समय से चल रही नेतृत्व की खींचतान अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस हाईकमान के हस्तक्षेप के बाद 30 मई को राज्य को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है।
बताया जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान ने इस मुद्दे पर दिल्ली में कई दौर की बैठकों का आयोजन किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दोनों नेताओं के साथ अलग-अलग और संयुक्त बैठकें कीं। सूत्रों के अनुसार, इन बैठकों में 2023 विधानसभा चुनाव के बाद कथित तौर पर हुए ‘ढाई-ढाई साल’ के सत्ता साझा फार्मूले पर भी चर्चा हुई।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी अब डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी में है। वहीं सिद्धारमैया को सम्मानजनक तरीके से राष्ट्रीय राजनीति में लाने के लिए कांग्रेस एक विशेष रणनीति पर काम कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक, सिद्धारमैया को आगामी राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाया जा सकता है। इसके अलावा उन्हें संगठन में भी बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। कांग्रेस नेतृत्व इस बदलाव के दौरान किसी प्रकार की अंदरूनी नाराजगी से बचने के लिए संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।
बताया जा रहा है कि यदि डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री बनते हैं, तो उनके केपीसीसी अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद सिद्धारमैया के करीबी नेता सतीश जारकीहोली को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है। साथ ही सिद्धारमैया के बेटे डॉ. यतींद्र सिद्धारमैया को भी नई कैबिनेट में अहम भूमिका मिलने की चर्चा है।
हालांकि, अब तक दोनों नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम पर सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है। लेकिन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया द्वारा बुलाई गई अनौपचारिक कैबिनेट बैठक और राज्यपाल से मुलाकात के समय मांगे जाने की खबरों ने कर्नाटक की राजनीति में हलचल और बढ़ा दी है।




