
New Delhi: बॉलीवुड अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत और योगगुरु बाबा रामदेव के बीच पिछले कुछ दिनों से चल रही बयानबाजी के बीच रामदेव ने रविवार को प्रतिक्रिया दी। कंगना की हालिया टिप्पणी को लेकर सवाल पूछे जाने पर रामदेव ने विवाद को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह “ओछे लोगों” के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते।
विवाद को आगे बढ़ाने से किया इनकार
रामदेव ने कहा कि वह इस मामले पर ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहते। उन्होंने कहा, “विवाद को बढ़ाना नहीं चाहता। स्वामी रामदेव क्या है, ये देश जानता है और उनका योगदान भी देश जानता है।”
इसके बाद कंगना का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि वह “ओछे लोगों के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते।”
Gen-Z पर कंगना की टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद
कंगना रनौत की Gen-Z को लेकर की गई टिप्पणी के बाद दोनों के बीच बयानबाजी शुरू हुई थी। कंगना ने नई पीढ़ी को लेकर “गटर जनरेशन” शब्द का इस्तेमाल किया था।
कंगना के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए रामदेव ने कहा था कि युवाओं को “जनरेशन गटर” कहना उचित नहीं है। उन्होंने इसे सोच से जुड़ी समस्या बताया था।
इसके बाद कंगना ने रामदेव पर तंज कसते हुए निजी टिप्पणी की थी। इसी के बाद दोनों के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई।
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का रामदेव ने किया समर्थन
रामदेव ने रविवार को ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ यानी एक देश, एक चुनाव के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि संत समाज इस पहल का समर्थन करता है।
रामदेव के मुताबिक, देश में बार-बार चुनाव होने से विकास कार्य प्रभावित होते हैं। उनका कहना है कि एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था से शिक्षा समेत कई अन्य क्षेत्रों पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि लगातार चुनावी गतिविधियों के चलते ऐसा प्रतीत होता है कि देश में पूरे साल चुनाव का माहौल बना रहता है। उनके अनुसार, एक देश-एक चुनाव से विकास की गति तेज हो सकती है और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
SC/ST के अपमान पर कही ये बात
रामदेव ने सामाजिक भेदभाव के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जिस तरह SC/ST समुदाय के अपमान को संविधान के खिलाफ माना जाता है, उसी तरह ब्राह्मणों के अपमान को भी संविधान के खिलाफ माना जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि छात्रों, मरीजों, सैनिकों, किसानों, SC/ST समुदायों और ब्राह्मणों के साथ अन्याय की शिकायतें भी सामने आती रहती हैं। रामदेव ने सभी समुदायों के समान सम्मान और अधिकारों की बात कही।




