
नई दिल्ली। संभल हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी मुल्ला अफरोज की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत निवारक हिरासत को रद्द कर दिया है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए हिरासत के आधार और अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाए। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये की लागत भी लगाई।
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मामला मुल्ला अफरोज की उस निवारक हिरासत से जुड़ा था, जिसे अक्टूबर 2025 में लागू किया गया था। इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जून 2026 में हिरासत को बरकरार रखा था। अफरोज ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
केवल कथित एक्स्ट्रा-जुडिशियल कन्फेशन पर निर्भरता पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि किसी व्यक्ति को NSA के तहत निवारक हिरासत में रखने के लिए केवल पुलिस के समक्ष दिए गए कथित एक्स्ट्रा-जुडिशियल कन्फेशन को अकेला आधार नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने हिरासत की वैधता की जांच करते हुए संबंधित सामग्री और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर भी विचार किया।
मामले के रिकॉर्ड में भी यह दर्ज है कि कई मामलों में अफरोज का नाम कथित तौर पर पुलिस के सामने दिए गए एक्स्ट्रा-जुडिशियल कन्फेशन के आधार पर सामने आया था।
NSA हिरासत रद्द, यूपी सरकार पर 10 लाख रुपये की लागत
सुप्रीम कोर्ट ने निवारक हिरासत को निरस्त करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये की लागत लगाने का आदेश दिया। अदालत का फैसला निवारक हिरासत के मामलों में कानूनी प्रक्रिया और संवैधानिक सुरक्षा उपायों के महत्व को रेखांकित करता है।
संभल में नवंबर 2024 में शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा हुई थी, जिसमें चार लोगों की मौत हुई थी। मुल्ला अफरोज को जनवरी 2025 में गिरफ्तार किया गया था और बाद में अक्टूबर 2025 में उनके खिलाफ NSA के तहत निवारक हिरासत का आदेश जारी किया गया था।




