
- रिपोर्ट: पंकज झा
वाराणसी। मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर परियोजना के अंतर्गत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी ने किसानों एवं किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तर प्रदेश में निर्यातोन्मुख सब्जी उत्पादन की संभावनाओं का आकलन करना, किसानों की उत्पादन क्षमता को समझना तथा उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप खेती के लिए मार्गदर्शन प्रदान करना था।
बैठक में विशेष रूप से मिर्च के निर्यात की संभावनाओं पर चर्चा की गई। किसानों को गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, सुरक्षित कृषि पद्धतियों तथा निर्यात मानकों के अनुरूप खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि किसानों को निर्यात आधारित कृषि प्रणाली से जोड़कर उनकी आय बढ़ाना संस्थान की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण एवं सुरक्षित उत्पादन के माध्यम से किसान वैश्विक बाजारों में बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकते हैं।
प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सुदर्शन मौर्य ने निर्यात फसलों में उपयोग किए जाने वाले स्वीकृत एवं प्रतिबंधित रसायनों की जानकारी दी। वहीं डॉ. आर. के. दुबे ने निर्यात के लिए उपयुक्त मटर की उन्नत किस्मों और उनकी वैश्विक मांग पर प्रकाश डाला। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. इंदीवर प्रसाद ने विभिन्न सब्जी फसलों की उन्नत किस्मों, संकर प्रजातियों और उनकी निर्यात संभावनाओं की विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कर्माकर ने भी किसानों के साथ तकनीकी विषयों पर चर्चा की।
बैठक में 20 से अधिक किसानों और विभिन्न किसान उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के समापन पर किसानों को निर्यातोन्मुख मिर्च संकर बीज वितरित किए गए। वैज्ञानिकों ने विश्वास व्यक्त किया कि किसानों, एफपीओ और वैज्ञानिकों के संयुक्त प्रयासों से उत्तर प्रदेश से सब्जियों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा किसानों की आय में स्थायी सुधार आएगा।





