
नई दिल्ली: सरकार द्वारा लड़कियों की शिक्षा और बाल विवाह रोकने के लिए लगातार अभियान चलाए जाने के बावजूद देश के कई राज्यों में यह कुप्रथा अब भी जारी है। ‘सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम’ (SRS) की सांख्यिकीय रिपोर्ट 2024 के अनुसार, पश्चिम बंगाल और झारखंड में देश के सबसे ज्यादा बाल विवाह दर्ज किए गए हैं। इन राज्यों में बड़ी संख्या में लड़कियों की शादी 18 साल की कानूनी उम्र पूरी होने से पहले ही कर दी जाती है।
भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं की शादी की औसत उम्र बढ़कर 23.1 वर्ष हो गई है और 73.5 प्रतिशत महिलाएं 21 साल की उम्र के बाद विवाह कर रही हैं। इसके बावजूद पूर्वी और मध्य भारत के कुछ राज्यों में बाल विवाह की समस्या गंभीर बनी हुई है।
हर चौथी लड़की की शादी 21 साल से पहले
रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में शादी करने वाली कुल महिलाओं में 2.1 प्रतिशत लड़कियां 18 साल से कम उम्र की थीं। वहीं 24.5 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 से 20 वर्ष की उम्र के बीच हुई। यानी देश में हर चार में से एक से अधिक महिला की शादी 21 वर्ष की उम्र पूरी होने से पहले हो गई।
बाल विवाह में पश्चिम बंगाल सबसे आगे
आंकड़ों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में 18 साल से कम उम्र में शादी करने वाली लड़कियों का अनुपात 6.3 प्रतिशत रहा, जो देश में सबसे ज्यादा है। झारखंड 4.9 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रहा। इसके अलावा छत्तीसगढ़ में भी 2.9 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 साल से पहले कर दी गई।
अगर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की तुलना करें, तो ग्रामीण भारत में 18 साल से पहले शादी करने वाली लड़कियों का अनुपात 2.4 प्रतिशत रहा, जबकि शहरी इलाकों में यह आंकड़ा 1.1 प्रतिशत दर्ज किया गया।
पश्चिम बंगाल के शहरों में भी बढ़ा बाल विवाह
रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि पश्चिम बंगाल के शहरी क्षेत्रों में भी बाल विवाह के मामले सबसे ज्यादा हैं। राज्य के ग्रामीण इलाकों में यह अनुपात 5.9 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 7.6 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो शहरी भारत के राष्ट्रीय औसत से कई गुना अधिक है।
दिल्ली और केरल बने उदाहरण
रिपोर्ट में दिल्ली और केरल की स्थिति सबसे बेहतर पाई गई। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बाल विवाह का एक भी मामला सामने नहीं आया, जबकि केरल में यह दर महज 0.04 प्रतिशत रही। हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में भी बाल विवाह के मामले बेहद कम दर्ज किए गए।
स्वास्थ्य और सामाजिक विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र में शादी होने से लड़कियों की पढ़ाई प्रभावित होती है और कम उम्र में मां बनने से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरे बढ़ जाते हैं। विशेषज्ञों ने इस समस्या को रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता और सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जरूरत बताई है।





