
दिल्ली के मालवीय नगर स्थित हौज रानी इलाके में हुए भीषण अग्निकांड की शुरुआती जांच रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इस हादसे में 22 लोगों की जान चली गई थी। अब एमसीडी और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट से पता चला है कि जिस गेस्ट हाउस में आग लगी, वह बिना आवश्यक अनुमति और फायर एनओसी के अवैध रूप से संचालित किया जा रहा था।
जांच में सामने आया कि इमारत के अंदर सीढ़ियों, छत और फर्श पर बड़ी मात्रा में ज्वलनशील प्लास्टिक और लकड़ी की सजावटी सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। इसके अलावा बहुमंजिला भवन में आने-जाने के लिए केवल एक संकरा रास्ता था, जिससे आग लगने के बाद लोगों के निकलने का मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया।
रिपोर्ट के अनुसार, हादसे की शुरुआत किचन में रखे ऑयल फ्रायर से हुई। कुक केशव नेगी ने फ्रायर चालू करने के बाद उसे बंद नहीं किया। लगातार गर्म होने से तेल ऑटो-इग्निशन तापमान तक पहुंच गया और उसमें आग लग गई। आग तेजी से फैलते हुए ऊपर बनी फाइबर की छत तक पहुंच गई और कुछ ही देर में पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया।
बताया गया है कि आग लगने के बाद कुक ने उसे बुझाने की कोशिश की, लेकिन जब हालात बिगड़ गए तो उसने लोगों को सतर्क करने या दमकल विभाग को सूचना देने के बजाय वहां से निकल जाना उचित समझा। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आग लगने और दमकल विभाग को सूचना मिलने के बीच करीब 30 मिनट का अंतर था। अधिकारियों का मानना है कि समय रहते सूचना दी जाती तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
इस हादसे ने दिल्ली के रिहायशी क्षेत्रों में चल रहे अवैध होटल और बीएंडबी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने मामले में होटल मैनेजर और कुक को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मालिक के करीबी मुनीम ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया है। आग के कारणों और उसके फैलने की प्रक्रिया की विस्तृत तकनीकी जांच के लिए दिल्ली पुलिस अब आईआईटी-दिल्ली की मदद लेने की तैयारी कर रही है।





