
- वाराणसी मंडल ब्यूरो
वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज हो गया है। मंगलवार को Gen Z छात्रों ने छात्रसंघ भवन स्थित डीएसडब्ल्यू कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर विश्वविद्यालय परिसर में छात्र राजनीति, लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और विद्यार्थियों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को फिर से प्रमुखता से उठा दिया। आंदोलनकारी छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखते हुए स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती, तब तक धरना जारी रहेगा। छात्रसंघ की बहाली के साथ जरूरतमंद विद्यार्थियों को छात्रावास उपलब्ध कराने और हॉस्टल में लागू कर्फ्यू के समय की समीक्षा करने की मांग ने इस आंदोलन को व्यापक मुद्दों से जोड़ दिया है।
धरने पर बैठे छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में निर्वाचित छात्रसंघ नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को अपनी समस्याओं और मांगों को सामूहिक रूप से प्रशासन के सामने रखने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उनका आरोप है कि विद्यार्थियों की आवाज को प्रभावी ढंग से उठाने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए एक मजबूत प्रतिनिधिक मंच की जरूरत है। छात्रों के मुताबिक, छात्रसंघ केवल चुनाव और पदाधिकारियों तक सीमित व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों के हितों की पैरवी करने, उनकी समस्याओं को सामने लाने और विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ संवाद स्थापित करने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
*छात्रसंघ बहाली को बनाया आंदोलन का मुख्य मुद्दा*
आंदोलनकारी छात्रों ने बीएचयू में छात्रसंघ की तत्काल बहाली की मांग को सबसे प्रमुख मुद्दा बताया है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अपनी बात रखने, शैक्षणिक और छात्रावास संबंधी समस्याओं को उठाने तथा प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखने के लिए लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। छात्रों का मानना है कि निर्वाचित छात्रसंघ की व्यवस्था होने से विद्यार्थियों की समस्याओं को संगठित तरीके से उठाया जा सकेगा और प्रशासन के साथ संवाद की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सकती है।
छात्रों ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) की तर्ज पर बीएचयू में भी छात्रसंघ बहाल करने की मांग उठाई है। उनके अनुसार, उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों की भागीदारी और प्रतिनिधित्व लोकतांत्रिक माहौल को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं। छात्रसंघ के माध्यम से विद्यार्थियों की समस्याओं, परिसर की सुविधाओं, शैक्षणिक वातावरण और छात्रहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा के लिए एक व्यवस्थित मंच उपलब्ध हो सकता है।
*जरूरतमंद विद्यार्थियों को छात्रावास उपलब्ध कराने की मांग*
छात्रों की दूसरी प्रमुख मांग जरूरतमंद विद्यार्थियों को छात्रावास उपलब्ध कराने से जुड़ी है। आंदोलनकारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए आवास की समुचित व्यवस्था बेहद जरूरी है। छात्रावास नहीं मिलने पर विद्यार्थियों को परिसर के बाहर रहने की व्यवस्था करनी पड़ सकती है, जिससे उनके आर्थिक खर्च बढ़ने के साथ पढ़ाई और दैनिक दिनचर्या पर भी असर पड़ सकता है।
छात्रों ने मांग की है कि जरूरतमंद विद्यार्थियों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए छात्रावास आवंटन की व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए। उनका कहना है कि शिक्षा के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित और सुविधाजनक आवास उपलब्ध होना चाहिए, ताकि वे बिना अनावश्यक परेशानियों के अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें। इस मुद्दे को लेकर आंदोलनकारी विश्वविद्यालय प्रशासन से सकारात्मक कदम उठाने की अपेक्षा कर रहे हैं।
*हॉस्टल कर्फ्यू के समय की समीक्षा की भी उठाई आवाज*
आंदोलन की तीसरी प्रमुख मांग छात्र-छात्राओं के छात्रावासों में लागू कर्फ्यू के समय से संबंधित है। आंदोलनकारी छात्रों ने इन नियमों की समीक्षा करने और अनुचित पाबंदियों को समाप्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि छात्रावासों में अनुशासन और सुरक्षा जरूरी हैं, लेकिन नियम बनाते समय विद्यार्थियों की शैक्षणिक गतिविधियों, पुस्तकालय में अध्ययन, अन्य अकादमिक आवश्यकताओं और उनकी व्यावहारिक जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
छात्रों का मानना है कि छात्रावास संबंधी व्यवस्थाएं ऐसी होनी चाहिए, जिनमें सुरक्षा और अनुशासन के साथ विद्यार्थियों की जरूरतों के बीच संतुलन बना रहे। इसी उद्देश्य से उन्होंने कर्फ्यू के समय की समीक्षा कर व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक और छात्रहित के अनुरूप बनाने की मांग उठाई है।
*अनिश्चितकालीन धरने से बढ़ी हलचल, प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार*
डीएसडब्ल्यू कार्यालय पर शुरू हुए धरने के जरिए आंदोलनकारी छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन तक अपनी मांगें पहुंचाने का प्रयास किया है। छात्रों ने बीएचयू के अन्य छात्र संगठनों और आम विद्यार्थियों से भी आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। उनका कहना है कि छात्रसंघ बहाली, छात्रावास की उपलब्धता और कर्फ्यू के नियमों का मुद्दा व्यापक छात्रहित से जुड़ा है, इसलिए विद्यार्थियों को इन विषयों पर एकजुट होकर अपनी बात रखनी चाहिए।
फिलहाल, छात्रों ने मांगों पर ठोस और सकारात्मक निर्णय होने तक अनिश्चितकालीन धरना जारी रखने का रुख अपनाया है। ऐसे में आने वाले दिनों में आंदोलन की दिशा विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया और छात्रों के साथ होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगी।
बीएचयू में शुरू हुए इस आंदोलन ने एक बार फिर छात्र प्रतिनिधित्व, परिसर में उपलब्ध सुविधाओं और छात्रावासों के नियमों को लेकर बहस तेज कर दी है। अब निगाहें विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि दोनों पक्षों के बीच संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो मांगों पर सहमति बनाने और आंदोलन से जुड़े मुद्दों का समाधान तलाशने का रास्ता निकल सकता है। हालांकि, फिलहाल छात्रों की ओर से उठाई गई तीनों मांगों पर विश्वविद्यालय प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने का इंतजार है।





