
- रिपोर्ट: पंकज झा..✍️
वाराणसी। चंदौली जनपद में संभावित अग्निकांड की घटनाओं पर प्रभावी रोकथाम और जनसुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कलेक्ट्रेट सभागार में एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) राजेश कुमार और अपर पुलिस अधीक्षक अनंत चंद्रशेखर ने की।बैठक में स्पष्ट किया गया कि सरकारी व अर्द्धसरकारी कार्यालयों, अस्पतालों, नर्सिंग होम, स्कूल-कॉलेज, कोचिंग सेंटर, होटल, मैरेज लॉन सहित सभी सार्वजनिक स्थलों पर अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
बैठक में नेशनल बिल्डिंग कोड (NBC 2016) तथा उत्तर प्रदेश शासनादेशों के तहत सभी श्रेणियों के संस्थानों में अग्नि सुरक्षा मानकों की समीक्षा की गई।अधिकारियों ने बताया कि छोटे सरकारी कार्यालयों में भले ही फायर NOC की छूट हो, लेकिन कार्यशील अग्निशामक यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) रखना अनिवार्य होगा। वहीं अस्पतालों के लिए नियम और अधिक सख्त किए गए हैं, क्योंकि वहां मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। 300 वर्ग मीटर तक के अस्पतालों में फायर एक्सटिंग्विशर, होज रील, मैनुअल अलार्म, 5000 लीटर वाटर टैंक और टेरेस पंप अनिवार्य किया गया है। वहीं इससे बड़े या बहुमंजिला अस्पतालों में ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर सिस्टम, स्मोक डिटेक्टर, बड़े वाटर स्टोरेज टैंक और उच्च क्षमता वाले फायर पंप अनिवार्य किए गए हैं।
बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि प्रत्येक विद्युत वितरण बोर्ड में MCB और RCCB की उचित व्यवस्था हो, ओवरलोडिंग पूरी तरह प्रतिबंधित रहे और हर संस्थान में नियमित विद्युत सुरक्षा ऑडिट कराया जाए। साथ ही हर तल पर फायर एक्सटिंग्विशर, CO₂ सिलेंडर, स्पष्ट निकास मार्ग और आपातकालीन सूचना पट्ट लगाना अनिवार्य किया गया है।
अपर जिलाधिकारी ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि सभी संस्थान एक सप्ताह के भीतर अपनी फायर सेफ्टी व्यवस्था दुरुस्त करें। इसके बाद अग्निशमन विभाग द्वारा सघन चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। नियमों की अनदेखी पाए जाने पर संबंधित संस्थान को सील करने के साथ प्रबंधन के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई और एफआईआर दर्ज की जाएगी।बैठक में मुख्य अग्निशमन अधिकारी, समस्त एसडीएम, प्रशासनिक अधिकारी तथा सरकारी और निजी संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।





