
- रिपोर्ट: अमित कुमार
अयोध्या: ‘हम मरीजों की नब्ज संभालें या घर का चूल्हा?’ तीन महीने से वेतन की बाट जोह रहे जिला चिकित्सालय के संविदा डॉक्टरों और कर्मचारियों का सब्र मंगलवार को टूट गया। इमरजेंसी के सामने धरने पर बैठे स्वास्थ्यकर्मियों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई।
‘बच्चों की फीस कहां से भरें, राशन कैसे लाएं’
प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों और कर्मियों का दर्द फूट पड़ा। बोले, ‘तीन महीने से एक रुपया नहीं मिला। घर चलाना मुश्किल हो गया है। बच्चों की पढ़ाई, दूध-दवा, बिजली का बिल— सब सिर पर चढ़ गया है।’ रोज इमरजेंसी में जिंदगी बचाने वाले खुद आर्थिक संकट में फंसे हैं।
अफसरों को पत्र, मिला सिर्फ आश्वासन
संविदा कर्मियों ने बताया कि वे लगातार मरीजों की सेवा में जुटे हैं, मगर वेतन के नाम पर सिस्टम ने हाथ खड़े कर दिए। कई बार अधिकारियों को पत्र देकर गुहार लगाई, पर हर बार ‘देखते हैं’ कहकर टाल दिया गया। अब बर्दाश्त की हद पार हो चुकी है।
चेतावनी: वेतन नहीं तो आंदोलन होगा तेज
संविदा कर्मी संगठन के पदाधिकारियों ने दो टूक कहा कि अगर जल्द वेतन का भुगतान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज होगा। जरूरत पड़ी तो अनवरत धरना शुरू किया जाएगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
मांग: सरकार सुने, तुरंत करे भुगतान
धरने पर बैठे कर्मचारियों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से फौरन समाधान की मांग की। सवाल सीधा है— जब इलाज करने वाले ही बीमार पड़ जाएंगे, तो अस्पताल कौन चलाएगा?
फिलहाल इमरजेंसी के बाहर गूंज रहे नारों के बीच प्रशासन की चुप्पी सबसे ज्यादा खल रही है। देखना है कि ‘सेवा’ के बदले ‘वेतन’ कब तक मिलता है।





