
- वाराणसी मंडल ब्यूरो
Varanasi: अपराधियों को उनके कृत्यों की सजा दिलाने के लिए चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ के तहत वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस की प्रभावी पैरवी का असर एक पुराने मारपीट के मामले में देखने को मिला। थाना लोहता में वर्ष 2015 में दर्ज मारपीट के मुकदमे में न्यायालय ने तीन अभियुक्तों को दोषसिद्ध पाते हुए न्यायालय उठने तक की सजा तथा कुल 1000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
थाना लोहता, कमिश्नरेट वाराणसी में दर्ज मु0अ0सं0-0109/2015, मु0नं0-1202/2015 के इस मामले में धारा 323 और 504 भादवि के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया था। मामले में पुलिस द्वारा विवेचना के बाद अभियुक्तों के विरुद्ध आवश्यक साक्ष्य एवं अभिलेख न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए।
प्रभावी पैरवी से दोषसिद्धि तक पहुंचा मामला
पुलिस के अनुसार, मुकदमे की सुनवाई के दौरान प्रभारी निरीक्षक लोहता एवं मॉनिटरिंग सेल, वाराणसी द्वारा मामले की प्रभावी पैरवी की गई। पुलिस की ओर से न्यायालय में उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष के तथ्यों को मजबूती से रखा गया। लगातार प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप माननीय न्यायालय ने तीनों अभियुक्तों को संबंधित धाराओं में दोषसिद्ध पाया।
07 अक्टूबर 2026 को माननीय एसीजेएम-07, जनपद वाराणसी के न्यायालय ने मामले में फैसला सुनाते हुए तीनों दोषियों को धारा 323 एवं 504 भादवि के तहत न्यायालय उठने तक की सजा तथा कुल 1000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
इन तीन अभियुक्तों को मिली सजा
मामले में दोषसिद्ध किए गए अभियुक्तों में—
1. रमाशंकर केशरवानी पुत्र कल्लू केशरवानी
2. मुन्नी देवी पत्नी रमाशंकर केशरवानी
3. विकाश पुत्र रमाशंकर केशरवानी
सभी निवासी बजरंग नगर, काली भिटारी, थाना लोहता, कमिश्नरेट वाराणसी शामिल हैं।
न्यायालय के आदेश के अनुसार तीनों को न्यायालय उठने तक की सजा के साथ 1000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है। अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में अभियुक्तों को तीन दिवस का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
पुराने मामलों में भी पैरवी पर जोर
‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ के तहत पुलिस का उद्देश्य केवल अभियुक्तों की गिरफ्तारी तक सीमित न रहकर न्यायालय में प्रभावी पैरवी के माध्यम से दोषियों को सजा दिलाना भी है। इसी क्रम में लोहता पुलिस और मॉनिटरिंग सेल द्वारा पुराने मुकदमों की प्रभावी पैरवी की जा रही है।
इस मामले में करीब 11 वर्ष पुराने मुकदमे में न्यायालय से दोषसिद्धि होना पुलिस की अभियोजन एवं मॉनिटरिंग व्यवस्था की सक्रियता को दर्शाता है। पुलिस का कहना है कि अपराधियों को कानून के तहत दंड दिलाने के लिए लंबित एवं विचाराधीन मामलों में प्रभावी पैरवी का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।





