
-रात के अंधेरे में शास्त्री पुल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, रोशनी और निगरानी के अभाव का फायदा उठाने की आशंका
- वाराणसी मंडल ब्यूरो पंकज झा
वाराणसी। मिर्जापुर प्रदेश में सड़कों, चौराहों और सार्वजनिक स्थलों को रोशन करने पर लगातार जोर दिया जा रहा है, लेकिन मिर्जापुर का महत्वपूर्ण शास्त्री पुल रात होते ही अंधेरे की चादर में नजर आता है। पुल पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं होने से राहगीरों की सुरक्षा के साथ-साथ अपराध नियंत्रण को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शास्त्री पुल मिर्जापुर के महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है और रात के समय यहां से बड़ी संख्या में लोगों और वाहनों का आवागमन होता है। ऐसे में पुल पर अंधेरा केवल रोशनी की समस्या नहीं, बल्कि सुरक्षा और निगरानी का भी मुद्दा बन जाता है। अंधेरे वाले स्थान अपराधियों के लिए छिपने, निगरानी से बचने या वारदात के बाद निकलने का आसान रास्ता बन सकते हैं—ऐसी आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों की नजर शास्त्री पुल की इस समस्या पर नहीं पड़ी? यदि पुल पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं है तो रात में पुलिस गश्त और निगरानी किस स्तर पर की जा रही है? क्या पुलिस के फैंटम दस्ते की नियमित निगरानी यहां होती है? स्थानीय लोगों का कहना है कि अंधेरे वाले हिस्सों में सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता की जरूरत है।
एसपी की निगाह कब जाएगी शास्त्री पुल के अंधेरे पर?
मिर्जापुर पुलिस अधीक्षक की ओर से अपराध नियंत्रण और रात्रिकालीन गश्त को लेकर लगातार प्रयास किए जाते हैं, लेकिन शास्त्री पुल की प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा पर अब सवाल उठ रहे हैं। क्या इस महत्वपूर्ण पुल का स्थलीय निरीक्षण कराकर अंधेरे वाले हिस्सों को चिन्हित किया जाएगा? यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
अंधेरा हटेगा तो सुरक्षा बढ़ेगी
शास्त्री पुल पर पर्याप्त स्ट्रीट लाइट और नियमित निगरानी की व्यवस्था होने से राहगीरों को सुरक्षा का भरोसा मिलेगा। साथ ही सीसीटीवी, नियमित पुलिस गश्त और खराब पड़ी लाइटों की तत्काल मरम्मत जैसी व्यवस्थाएं भी प्रभावी साबित हो सकती हैं।
फिलहाल सवाल सीधा है—जब प्रदेश में सार्वजनिक स्थलों को रोशन करने पर जोर दिया जा रहा है, तो शास्त्री पुल अंधेरे में क्यों है? क्या जिम्मेदार विभाग इस अंधेरे को दूर कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करेंगे, या फिर किसी अप्रिय घटना के बाद ही प्रशासन की नींद टूटेगी?





