
- रिपोर्ट: प्राची सिंह
New Delhi: बदलते मौसम के बीच देश के कई हिस्सों में खांसी, सर्दी और बुखार के मामलों में बढ़ोतरी से लोगों की चिंता बढ़ गई है। इसी बीच इन्फ्लूएंजा ए (H1N1) के एक स्ट्रेन को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं सामने आ रही थीं। हालांकि, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने इसे लेकर राहत की जानकारी दी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, हर खांसी, जुकाम या बुखार को स्वाइन फ्लू समझने की जरूरत नहीं है। मौजूदा H1N1 वायरस को लेकर घबराने के बजाय लक्षणों पर नजर रखना और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
H1N1 का नया स्ट्रेन नहीं, वैक्सीन से मिल रहा अच्छा बचाव
ICMR के वैज्ञानिकों के अनुसार, देश में सामने आ रहा इन्फ्लूएंजा ए (H1N1) pdm09 वायरस (A/Missouri/11/2025) कोई नया वेरिएंट नहीं है। यह वायरस क्लेड 6B.1A.5a2a और सब-क्लेड D.3.1.1 से संबंधित है और 2025 से भारत में मौजूद है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा वायरस स्ट्रेन उपलब्ध फ्लू वैक्सीन से अच्छी तरह मेल खाता है। ऐसे में वर्तमान वैक्सीन इस वायरस से बचाव में प्रभावी मानी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग भी स्थिति पर लगातार निगरानी रख रहा है।
आराम और पर्याप्त तरल पदार्थ से मिल सकती है राहत
विशेषज्ञों के अनुसार मौसमी इन्फ्लूएंजा, जिसमें H1N1 भी शामिल है, आमतौर पर सेल्फ-लिमिटिंग बीमारी होती है। इसके प्रमुख लक्षणों में अचानक तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी शामिल हैं।
अधिकांश मामलों में मरीज करीब एक सप्ताह में ठीक हो जाता है। पर्याप्त आराम और तरल पदार्थों का सेवन करने से कई मरीज कुछ दिनों में बेहतर महसूस करने लगते हैं। इसलिए सर्दी, खांसी या बुखार होने पर घबराने के बजाय लक्षणों पर नजर रखना और उचित देखभाल करना जरूरी है।
बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा सावधानी की जरूरत
हालांकि अधिकांश स्वस्थ लोग फ्लू से आसानी से ठीक हो जाते हैं, लेकिन छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों में जटिलताओं का जोखिम अधिक हो सकता है।
अगर बुखार या अन्य लक्षण लगातार बढ़ रहे हों, हालत में सुधार न हो रहा हो या सांस लेने में परेशानी महसूस हो तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। सांस लेने में गंभीर परेशानी, अत्यधिक कमजोरी या चेतना में बदलाव जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।





