
- रिपोर्ट: प्राची सिंह
New Delhi: नीट (NEET) पेपर लीक और अन्य परीक्षाओं में कथित धांधली के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने निर्देश दिया है कि मामले की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ से जुड़े आरोपों को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी।
वकील ने उठाया छात्राओं से कथित बदसलूकी का मुद्दा
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने जंतर-मंतर पर महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाया। उन्होंने पुलिसकर्मियों पर छात्राओं के साथ छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच की मांग की।
वकील ने अदालत को बताया कि कुछ छात्राओं ने सोशल मीडिया के जरिए अपने साथ हुई कथित घटनाओं के बारे में जानकारी साझा की है। उन्होंने मांग की कि शिकायतों की जांच के लिए किसी जिला जज को जिम्मेदारी दी जाए, ताकि पीड़ित छात्राएं बिना डर के अपनी शिकायत दर्ज करा सकें।
नोडल अधिकारी के पास सीधे दर्ज हो सकेगी शिकायत
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने बताया कि इस मुद्दे से संबंधित एक अलग रिट याचिका भी दाखिल की गई है। वहीं, CJI सूर्यकांत ने कहा कि उच्चस्तरीय जांच समिति को संवेदनशील मामलों पर जल्द अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि समिति के चेयरपर्सन एक विशेष नोडल अधिकारी नियुक्त कर सकते हैं। पीड़ित छात्राएं इस अधिकारी के समक्ष सीधे अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगी।
पांच सदस्यीय समिति करेगी जांच
जंतर-मंतर समेत देश के अन्य हिस्सों में 20 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई और कथित हिंसा की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की है।
समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं। समिति में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश शालिंदर कौर, सीबीआई के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व पुलिस महानिदेशक एल.आर. बिश्नोई शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने समिति से निष्पक्ष जांच करने और महिलाओं से जुड़े कथित उत्पीड़न के मामलों को संवेदनशीलता के साथ प्राथमिकता देने को कहा है।





