
- रिपोर्ट: प्राची सिंह
रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर राखी बांधना सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि भाई की सुख-समृद्धि, दीर्घायु और सुरक्षा की मंगलकामना से जुड़ा धार्मिक संकल्प माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राखी बांधते समय तीन गांठें लगाने का विशेष महत्व है। माना जाता है कि इन तीन गांठों के पीछे पौराणिक और आध्यात्मिक रहस्य छिपा है।
पहली से तीसरी गांठ तक क्या है महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राखी की तीन गांठें त्रिदेव—ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक मानी जाती हैं।
- पहली गांठ भगवान ब्रह्मा को समर्पित मानी जाती है। इसे भाई के अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना से जोड़ा जाता है।
- दूसरी गांठ भगवान विष्णु का प्रतीक मानी जाती है। मान्यता है कि इससे भाई के जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता बनी रहती है।
- तीसरी गांठ भगवान शिव को समर्पित मानी जाती है। इसे भाई को संकट और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा मिलने की धार्मिक मान्यता से जोड़ा जाता है।
तीन गांठों का पुरुषार्थ और त्रिगुण से संबंध
धार्मिक मान्यताओं में राखी की तीन गांठों को जीवन के प्रमुख पुरुषार्थों—धर्म, अर्थ और काम से भी जोड़ा जाता है। इसके अलावा इन्हें सत्व, रज और तम तीन गुणों के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है।
कुछ पौराणिक मान्यताओं के अनुसार तीन गांठों वाला रक्षासूत्र भाई के लिए तीनों लोकों—पृथ्वी, आकाश और पाताल—से जुड़े संकटों से रक्षा का प्रतीक माना जाता है।
राखी बांधने की सही विधि क्या है?
रक्षाबंधन के दिन राखी बांधते समय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ बातों का ध्यान रखा जाता है। सबसे पहले भाई को स्वच्छ स्थान पर बैठाकर उसके माथे पर रोली और अक्षत का तिलक लगाया जाता है। इसके बाद भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा जाता है और तीन गांठें लगाई जाती हैं।
मान्यता के अनुसार राखी बांधते समय भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर और बहन का मुख पश्चिम दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है। दोनों का सिर ढका होना भी कई परंपराओं में शुभ माना गया है। साथ ही, भद्रा काल में राखी बांधने से बचने की धार्मिक मान्यता है।
राखी बांधते समय इन बातों का रखें ध्यान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रक्षासूत्र को केवल कलाई पर लपेट देना पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि इसे शुभ संकल्प के साथ बांधना चाहिए। इस दौरान बहन को भाई की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करनी चाहिए।
राखी बांधते समय ‘येन बद्धो बली राजा…’ मंत्र का जाप करने की भी धार्मिक परंपरा है। कुछ मान्यताओं में रक्षाबंधन के दिन भाई-बहन को काले रंग के कपड़े पहनने से बचने की सलाह दी जाती है।
भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा का पर्व है रक्षाबंधन
रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के संकल्प का पर्व है। राखी की तीन गांठें इसी रिश्ते में प्रेम, मंगलकामना और सुरक्षा के प्रतीक के रूप में देखी जाती हैं। इस रक्षाबंधन पर राखी बांधते समय विधि-विधान के साथ भाई की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की कामना करें।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक और सामाजिक मान्यताओं पर आधारित है। अलग-अलग परंपराओं और क्षेत्रों में मान्यताएं भिन्न हो सकती हैं। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के लिए विशेषज्ञ या आचार्य की सलाह ली जा सकती है।





