
- वाराणसी मंडल ब्यूरो पंकज झा की कलम से✍️✍️
Varanasi: उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद के सुजाबाद, थाना रामनगर क्षेत्र से सामने आ रही तस्वीरें और स्थानीय लोगों के आरोप कई गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि जहां सरकारी नियमों के अनुसार शराब की दुकानें सुबह 10:00 बजे खुलनी चाहिए, वहीं इस क्षेत्र में सुबह उजाला होते ही कथित रूप से शराब की बिक्री शुरू हो जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सूरज निकलते ही शराब खरीदने वालों की आवाजाही शुरू हो जाती है और कथित रूप से बिक्री भी धड़ल्ले से होती है। यदि ऐसा हो रहा है, तो सवाल उठना लाज़िमी है कि आखिर यह सब किसके इशारे पर हो रहा है? किसके संरक्षण में शराब संचालक इतने बेखौफ होकर नियमों को चुनौती दे रहे हैं?
सबसे बड़ा सवाल पुलिस व्यवस्था पर उठ रहा है। जब क्षेत्र में नियमित गश्त, फैंटम पुलिस और स्थानीय थाना पुलिस सक्रिय रहती है, तो क्या उनकी नजर इस गतिविधि पर नहीं पड़ती? और यदि पड़ती है, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं होती? आखिर ऐसा कौन-सा कारण है कि खुलेआम नियमों के कथित उल्लंघन के बावजूद जिम्मेदार विभाग मौन दिखाई देता है?
यह मामला केवल समय से पहले शराब बिक्री का नहीं, बल्कि कानून के शासन और प्रशासनिक जवाबदेही का भी है। यदि स्थानीय लोगों के आरोप सही हैं, तो यह गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं यदि आरोप गलत हैं, तो प्रशासन को तथ्य सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि अफवाहों और शंकाओं पर विराम लग सके।
जनता पूछ रही है—
- क्या नियम सिर्फ कागजों तक सीमित हैं?
- किसके इशारे पर शराब संचालक बेखौफ होकर कथित रूप से सुबह से बिक्री कर रहे हैं?
- फैंटम और स्थानीय पुलिस की निगाह इस गतिविधि तक क्यों नहीं पहुंचती?
- क्या जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाएंगे?
अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। क्षेत्र की जनता कार्रवाई चाहती है, क्योंकि सवाल सिर्फ शराब बिक्री का नहीं, बल्कि कानून के समान पालन और प्रशासन की जवाबदेही का भी है।




