
- रिपोर्ट: अनुराग सिंह बिष्ट/ब्यूरो लखनऊ
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने प्रदेश की सभी बार एसोसिएशनों के लिए सख्त आदेश जारी किए हैं। बार काउंसिल ने सभी बार एसोसिएशनों से कहा है कि वे 15 दिनों के भीतर उन अधिवक्ताओं की सूची उपलब्ध कराएं, जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामलों में एफआईआर दर्ज है, चार्जशीट दाखिल हो चुकी है या जिनके मामले अदालत में विचाराधीन (ट्रायल) हैं।
बार काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में की जा रही है और सभी बार एसोसिएशनों को तय समय सीमा के भीतर जानकारी उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
15 दिन में सूची नहीं देने पर होगी कड़ी कार्रवाई
बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने चेतावनी दी है कि यदि कोई बार एसोसिएशन निर्धारित 15 दिनों के भीतर मांगी गई सूची उपलब्ध नहीं कराता है, तो उसकी मान्यता तत्काल प्रभाव से निरस्त की जा सकती है।
इसके अलावा, ऐसे बार एसोसिएशनों से जुड़े अधिवक्ताओं को बार काउंसिल की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिलेगा।
आदेश की अनदेखी को माना जाएगा गंभीर मामला
बार काउंसिल ने अपने आदेश में कहा है कि इस निर्देश की अनदेखी को इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना के रूप में देखा जाएगा। इसलिए सभी बार एसोसिएशनों को समयबद्ध तरीके से आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
इस फैसले को न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता और अधिवक्ता समुदाय की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




