
- वाराणसी मंडल ब्यूरो पंकज झा✍️
वाराणसी। न्याय दिलाने वाले स्थानों पर ही यदि महिलाओं को अन्याय का सामना करना पड़े, तो यह पूरे समाज और व्यवस्था के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन जाता है। महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों को लेकर सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘मिशन शक्ति’ और ‘बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ’ जैसे अभियानों के बीच ऐसे मामले कई सवाल खड़े करते हैं।
पीड़ित महिलाओं का कहना है कि जब कानून की रक्षा करने वाले ही कानून की सीमाओं को लांघने लगें, तो आम महिलाओं को न्याय और सुरक्षा की उम्मीद कहां से मिलेगी। न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा तभी मजबूत रह सकता है, जब हर व्यक्ति को समान अधिकार, सम्मान और निष्पक्ष सुनवाई का भरोसा मिले।
महिलाओं के साथ होने वाले किसी भी प्रकार के अन्याय के खिलाफ सख्त कार्रवाई और संवेदनशील रवैया समय की मांग है। कानून सबके लिए समान है और उसकी गरिमा बनाए रखना हर जिम्मेदार व्यक्ति का कर्तव्य है।
वाराणसी से उठी यह आवाज एक बड़े सवाल की ओर इशारा करती है—यदि न्याय के द्वार पर ही पीड़ितों को संघर्ष करना पड़े, तो फिर समाज में महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा का सपना कैसे पूरा होगा?
अब जरूरत है कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच हो, पीड़ितों को न्याय मिले और कानून व्यवस्था पर जनता का विश्वास और मजबूत हो।





