
- रिपोर्ट: प्राची सिंह
नई दिल्ली: बच्चे के जन्म के बाद उसकी गर्भनाल (अम्बिलिकल कॉर्ड) को लेकर कई सवाल लोगों के मन में आते हैं। गर्भावस्था के दौरान यही गर्भनाल मां और शिशु को जोड़ती है तथा बच्चे तक पोषण और ऑक्सीजन पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य करती है। जन्म के बाद डॉक्टर गर्भनाल को काट देते हैं, लेकिन उसका एक छोटा हिस्सा नवजात की नाभि से जुड़ा रहने दिया जाता है ताकि संक्रमण का खतरा कम हो और नाभि सामान्य रूप से ठीक हो सके।
कब अलग होती है गर्भनाल?
आमतौर पर जन्म के 1 से 3 सप्ताह के भीतर गर्भनाल का बचा हुआ हिस्सा सूखकर अपने आप गिर जाता है। इस दौरान नाभि की विशेष देखभाल जरूरी होती है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि नाभि को हमेशा साफ और सूखा रखा जाए तथा संक्रमण से बचाने के लिए अनावश्यक रूप से उसे छेड़ा न जाए।
गर्भनाल को लेकर क्या हैं पारंपरिक मान्यताएं?
भारत के विभिन्न हिस्सों में गर्भनाल को लेकर अलग-अलग परंपराएं और धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं।
- कई परिवार गर्भनाल को मिट्टी में दबा देते हैं। मान्यता है कि इससे बच्चे का प्रकृति से जुड़ाव बना रहता है और उसे जीवन में स्थिरता व सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
- कुछ लोग इसे साफ कपड़े में लपेटकर सुरक्षित डिब्बे में संभालकर रखते हैं और इसे बच्चे के जन्म की यादगार मानते हैं।
- कुछ समुदायों में गर्भनाल को सोने, चांदी या तांबे के लॉकेट में रखकर ताबीज के रूप में पहनाने की भी परंपरा है। यह पूरी तरह धार्मिक और सांस्कृतिक विश्वासों पर आधारित प्रथा है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण क्या कहता है?
चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, जन्म के बाद गर्भनाल शरीर का एक जैविक अवशेष (Biological Tissue) होती है। इसे सुरक्षित रखने, दफनाने या नष्ट करने से बच्चे के स्वास्थ्य पर कोई प्रत्यक्ष वैज्ञानिक प्रभाव पड़ने के प्रमाण नहीं हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि सबसे महत्वपूर्ण बात नवजात की नाभि की सही देखभाल करना है, क्योंकि शुरुआती दिनों में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है।
नवजात की नाभि की देखभाल कैसे करें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार—
- नाभि को हमेशा साफ और सूखा रखें।
- गर्भनाल या नाभि को छूने से पहले हाथ अच्छी तरह धोएं।
- नाभि पर अनावश्यक तेल, पाउडर या घरेलू चीजें लगाने से बचें।
- यदि नाभि से लगातार खून आए, दुर्गंध, सूजन, लालिमा या पस दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
परंपरा और विज्ञान का संतुलन जरूरी
गर्भनाल को लेकर अलग-अलग समाजों में अलग-अलग मान्यताएं और भावनात्मक जुड़ाव देखने को मिलता है। जहां कई परिवार इसे परंपरा और संस्कार का हिस्सा मानकर सुरक्षित रखते हैं, वहीं चिकित्सा विज्ञान इसे नवजात देखभाल की एक सामान्य प्रक्रिया मानता है। विशेषज्ञों का कहना है कि चाहे कोई भी परंपरा अपनाई जाए, सबसे अधिक महत्व बच्चे की सुरक्षा, स्वच्छता और स्वास्थ्य को दिया जाना चाहिए।




