
- रिपोर्ट: अनुराग सिंह बिष्ट
लखनऊ विकास प्राधिकरण प्रवर्तन जोन 7 के बाजार खाला थाना क्षेत्र के अशरफाबाद स्थित वत्सला हॉस्पिटल के सामने तत्कालीन अवर अभियंता अंगद सिंह वर्तमान अवर अभियंता के संरक्षण के चलते अनधिकृत निर्माणकर्ता के द्वारा 29 मई 2026 को सील किए गए अनधिकृत निर्माण की सील तोड़कर निर्माण पूर्ण कर अध्याशित करने की तैयारी में है।
विदित होकि जोनल अधिकारी प्रभाकर के निर्देश पर 29 मई 2026 को अनधिकृत निर्माण के संरक्षणदाता अवर अभियंता अंगद सिंह सील तो कर दिया गया था लेकिन यारी छूटे ना वाली कहावत चरितार्थ करते हुए,सील तुड़वाकर टीनशेड और पर्दा लगाकर अंदर ही अंदर कार्य पूर्ण करवा कर,29 जून 2026 को पर्दा तथा टीन सेट हटा दिया गया।
वही,प्रभावशाली बिल्डर ने एक बार फिर यह बता दिया कि मैं जो चाहूं वह कर सकता हूं,यहां सब खरीदा जा सकता क्योंकि पैसे से बढ़कर कुछ नहीं?
प्रदेश के मुख्यमंत्री सील निर्माणों की फाइलें जांचने की बात कर रहे हैं,तो वही एलडीए के भ्रष्ट अधिकारी सील निर्माणों को अध्यासित करवा रहे हैं।
अब देखने वाली बात यह है कि,LDA प्रशासन ने तो हमेशा की तरह बिल्डर के प्रति वफादारी दिखाते हुए सील निर्माण को पूरा करा दिया,लेकिन शासन स्तर पर क्या कोई कार्यवाही होगी या नहीं? या फिर भ्रष्टाचार की भेट चढ़ते इस तरह के सील निर्माण मुख्यमंत्री के जीरो ट्रॉलेंस की नीतियों को मुंह चिढ़ाते रहेगे?
बता दें कि ये तस्वीर 4 दिन पुरानी है,और आज बताया जा रहा है कि सील निर्माण को बचाने और LDA विभाग को दिखाने के लिए,इसपर फिर लिख दिया गया है कि “पुनः सील किया गया” हालांकि यह भी बताया जा रहा है कि यह खेल क्षेत्रीय अधिकारियों और निर्माणकर्ता ने मिलकर रचा है!
अब देखने और सोचने वाली बात यह है कि जब निर्माण सील किया गया था तब की फोटो और अब की फोटो को देखा जाए तो निर्माण तैयार हो चुका है,मामले की क्षेत्रीय अधिकारियों से शिकायत के बाद न तो निर्माण कार्य रुका न निर्माणकर्ता पर कोई कार्यवाही की गई,जो खुद अपने आप में भ्रष्टाचार को दिखा रहा है!
👉अब सवाल यह उठता है कि जब निर्माण सील था तो बनकर तैयार कैसे हो गया?
👉 सील पट्टे को पहले हटा दिया गया था तो अब किसके कहने पर फिर से पुन:सील निर्माण पर “निर्माण सील है” क्यों लिखा गया?
लखनऊ विकास प्राधिकरण प्रवर्तन जोन 7 थाना बाजारखाला क्षेत्र के अंतर्गत वत्सला अस्पताल के सामने बन रही अनधिकृत सील निर्माण या यह कहे की बन चुके निर्माण का मामला है।





