
लखनऊ के रहने वाले आवेदक आशा राम एडवोकेट ने थाना चिनहट की अपट्रान चौकी के तत्कालीन चौकी इंचार्ज धनंजय सिंह और वरिष्ठ उपनिरीक्षक मनोज कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि क्षेत्रीय खनन माफियाओं और अपराधियों से कथित सांठगांठ कर दोनों पुलिसकर्मी अपने प्रभाव का दुरुपयोग कर रहे थे।
आवेदक के अनुसार, 24 फरवरी 2025 को उन पर जानलेवा हमला हुआ था, जिसकी विवेचना अपट्रान चौकी इंचार्ज धनंजय सिंह को सौंपी गई थी। आरोप है कि विवेचना के दौरान धनंजय सिंह ने विपक्षी पक्ष से मोटी रकम लेकर वास्तविक आरोपियों को बचाने और अन्य लोगों को मामले में नामजद कर कार्रवाई की।
आशा राम एडवोकेट का कहना है कि जब उन्हें इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने विवेचना को स्थानांतरित कराने का प्रयास किया, लेकिन उससे भी कोई विशेष लाभ नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में उसी थाने के वरिष्ठ उपनिरीक्षक मनोज कुमार ने धनंजय सिंह के साथ मिलीभगत कर उनसे एक लाख रुपये रिश्वत की मांग की।
आरोप है कि रिश्वत न देने पर उनके साथ गाली-गलौज की गई, जान से मारने की धमकी दी गई और उनकी एफआईआर में लगी धाराओं को भी कम कर दिया गया।
पीड़ित ने मामले की शिकायत करते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से संबंधित न्यायालय में धारा 156(3) के तहत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। उनके अनुसार, न्यायालय ने प्रस्तुत तथ्यों पर संज्ञान लेते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध परिवाद के रूप में मुकदमा दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई करने का आदेश जारी किया है।
नोट: यह समाचार उपलब्ध आरोपों और शिकायतकर्ता के दावों पर आधारित है। संबंधित पुलिसकर्मियों या पुलिस विभाग का पक्ष सामने आने पर उसे भी शामिल किया जाना चाहिए।





