
- आदेश की आड़ में पैतृक जमीन पर जबरन इबादत? किसान पहुंचा हाईकोर्ट, अफसरों पर अवमानना का आरोप
- रिपोर्ट: अमित कुमार
अयोध्या, रौनाही : ड्यौढ़ी बाजार में बकरीद पर पुलिस के साए में किसान की पैतृक जमीन पर नमाज अदा कराने का मामला तूल पकड़ गया है। किसान आत्म प्रकाश सिंह का आरोप है कि हाईकोर्ट का आदेश PWD की जमीन के लिए था, मगर प्रशासन ने उनकी गाटा संख्या 94 मि० की निजी खेत पर भारी फोर्स लगाकर नमाज पढ़वा दी।
‘मेरी जमीन, मुकदमा विचाराधीन, फिर भी पुलिस का पहरा’
बभनियावां निवासी आत्म प्रकाश सिंह ने कहा कि विवादित भूमि उनकी खेतौनी की पैतृक जमीन है। इससे जुड़ी याचिका न्यायालय में विचाराधीन है। आरोप है कि 21 मार्च 2026 को भी पुलिस-PAC ने परिवार को धमकाकर जबरन नमाज करवाई थी। इस बार बकरीद पर फिर वही दोहराया गया।

हाईकोर्ट के आदेश में ‘94 मि०’ का जिक्र ही नहीं
किसान का दावा है कि अजमत अली की याचिका 12068/2025 में हाईकोर्ट ने PWD की भूमि पर प्रार्थना की अनुमति दी थी। उस मुकदमे में आत्म प्रकाश को पक्षकार ही नहीं बनाया गया। 6 मई 2026 को पुनर्विचार याचिका पर दो सदस्यीय खंडपीठ ने साफ कहा कि 13 मार्च 2026 के आदेश से याचिकाकर्ता की खतौनी प्रभावित नहीं होती। यानी गाटा संख्या 94 मि० पर नमाज का कोई आदेश नहीं था।
19 मई को DM-SSP को दिया पत्र, फिर भी नहीं रुकी पुलिस
आत्म प्रकाश ने बताया कि 19 मई 2026 को जिलाधिकारी, एसएसपी, एसडीएम सोहावल, थाना प्रभारी रौनाही को हाईकोर्ट का आदेश संलग्न कर पत्र दिया था। इसके बावजूद एसडीएम सविता राजपूत, एसपी ग्रामीण बलवंत चौधरी, सीओ सदर अरविंद सोनकर, थाना प्रभारी लालचंद सरोज, चौकी प्रभारी देवेंद्र नाथ राय व भारी पुलिस-PAC बल की मौजूदगी में उनकी जमीन पर नमाज अदा कराई गई।

पुलिस बोली- ‘रोक का आदेश नहीं’, किसान बोला- ‘जाऊंगा कोर्ट’
रौनाही पुलिस का तर्क है कि न्यायालय ने नमाज अदा करने से रोकने का कोई आदेश पारित नहीं किया है। डीएम के आदेश पर शांति व्यवस्था कायम की गई। वहीं आत्म प्रकाश सिंह ने कहा कि जबरन नमाज अदा कराने के खिलाफ वे फिर न्यायालय जाएंगे। कोर्ट के आदेश की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
क्षेत्र में आक्रोश, उठ रहे सवाल
घटना के बाद पूरे क्षेत्र में आलोचना हो रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब हाईकोर्ट ने PWD की जमीन पर प्रार्थना की बात कही थी, तो किसान की निजी जमीन पर किसके आदेश से नमाज पढ़वाई गई? प्रशासन की भूमिका पर भी अंगुली उठ रही है। मामला अब कानून के साथ-साथ सियासी तूल भी पकड़ सकता है।





