
-फीस के नाम पर हजारों की लूट, न बिल न कोई रसीद, खुले आम टैक्स चोरी
- रिपोर्ट: अनुराग सिंह बिष्ट
लखनऊ: देश भर में डॉक्टरों की फीस के नाम पर अवैध वसूली किसी से छुपी नहीं है,फीस के नाम पर हजारों की लूट और टैक्स के नाम शून्य। यह कोई नई बात नहीं है यह तो वर्षों से चला आ रहा है,मरीजों से फीस के नाम पर हजारों रुपए वसूले जाते है,महीनों की वसूली लाखों में आती है,और यह अवैध वसूली सरकारी खजाने तक न पहुंच सके,इसके लिए मरीजों को न तो कोई रसीद दी जाती है न कोई बिल, यानी टैक्स की सौ प्रतिशत चोरी। यानी सारा कालाधन अपनी जेब में।
सरकार को कालेधन की भनक तक न लगे इसके “ऑनलाइन सुविधाएं” भी यहां काम नहीं करती। कमाल की बात तो यह है कि यह सब सबकी आंखों के सामने होता है। सरकारी विभागों से लेकर सभी जांच एजेंसियों तक,सबको इस लूट के बारे में पता है, शायद ही कोई ऐसा हो, जो इस लूट से बचा हो,लेकिन इसके बावजूद मजाल है कि आज तक किसी सामाजिक संगठन या किसी नेता ने इस पर आवाज उठाई हो, इसके अलावा संबंधित विभागों ने भी आज तक इस लूट पर कोई कार्यवाही नहीं की।
अब इसके पीछे क्या कारण है यह तो ईश्वर ही जानता है?
हालांकि ये लूट जगजाहिर है और हर एक शख़्स को इससे दो चार होना पड़ता है।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर कब सरकार और संबंधित विभागों की लाल आंखे इन लुटेरों पर पड़ेगी,कब इनपर कार्यवाही होगी,और कब मरीजों से फीस के नाम पर लूटे जा रहे कालेधन का सरकारी खजाने तक जाने का रास्ता बनाया जाएगा?





