
प्रयागराज। Allahabad High Court में एक अनोखे घटनाक्रम में डिवीजन बेंच के दो न्यायाधीशों ने एक ही मामले में अलग-अलग अंतरिम आदेश जारी कर दिए। जस्टिस Atul Sridharan और जस्टिस Vivek Saran की बेंच टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें National Human Rights Commission (NHRC) के कुछ आदेशों को चुनौती दी गई थी।
NHRC के अधिकार क्षेत्र पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान जस्टिस अतुल श्रीधरन ने एनएचआरसी की कार्यप्रणाली और अधिकार क्षेत्र पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आयोग उन मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है, जो उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर प्रतीत होते हैं। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों के मामलों की अनदेखी कर रहा है और अपेक्षाकृत कम महत्वपूर्ण विषयों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
जस्टिस श्रीधरन ने कहा कि जिन मामलों में लोगों पर हमले, उत्पीड़न या अन्य गंभीर घटनाएं होती हैं, उनमें स्वतः संज्ञान लेने के बजाय आयोग अन्य विषयों में सक्रिय नजर आता है। उन्होंने इस तरह की “चयनात्मक सक्रियता” को चिंताजनक बताया।
दूसरे जज ने जताई असहमति
वहीं, जस्टिस विवेक सरन ने इन टिप्पणियों से असहमति जताते हुए अलग आदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण निष्कर्ष बिना सभी पक्षों को सुने नहीं निकाले जाने चाहिए। उन्होंने प्रक्रिया के पालन पर जोर देते हुए कहा कि सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का पूरा अवसर मिलना जरूरी है।
मामला फिलहाल लंबित
दोनों न्यायाधीशों के अलग-अलग विचारों के कारण मामला फिलहाल लंबित हो गया है और आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। इस घटनाक्रम ने न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतभेदों के महत्व को उजागर किया है, साथ ही न्यायपालिका और मानवाधिकार आयोग के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को भी सामने रखा है।





