
- रिपोर्ट: पंकज झा
वाराणसी: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से मिलने वाली जानकारी की विश्वसनीयता को लेकर वाराणसी के जिला एवं सत्र न्यायालय में एक अहम मामला सामने आया है।सारनाथ क्षेत्र के तिलमापुर गांव के पूर्व प्रधान और अधिवक्ता नागेश्वर मिश्रा ने मेटा कंपनी के एआई प्लेटफॉर्म के खिलाफ अदालत में प्रकीर्ण वाद दायर किया है। उनका आरोप है कि मेटा एआई धार्मिक विषयों से संबंधित जानकारी देते समय गलत तथ्य प्रस्तुत कर रहा है, जिससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
यह वाद अवर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय की अदालत में दाखिल किया गया है। अदालत ने मामले को संज्ञान में लेते हुए सारनाथ थाने से पूरे प्रकरण पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और अगली सुनवाई के लिए 16 मार्च की तारीख निर्धारित की है।
शिव-पार्वती विवाह के महीने को लेकर उठाया सवाल
अधिवक्ता नागेश्वर मिश्रा का कहना है कि मेटा एआई स्वयं को ऐसा प्लेटफॉर्म बताता है जिसके पास लगभग हर विषय से जुड़े सवालों के उत्तर मौजूद हैं। इसी दावे की जांच करने के लिए उन्होंने एआई से भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के महीने के बारे में प्रश्न किया।
मिश्रा के अनुसार एआई ने उत्तर दिया कि भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह फाल्गुन महीने में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से जुड़ा है, जिसे महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। अधिवक्ता का दावा है कि यह जानकारी शास्त्रों के अनुसार सही नहीं है और इससे धार्मिक तथ्यों को लेकर भ्रम फैल सकता है।
आपत्ति के बाद बदला गया जवाब
नागेश्वर मिश्रा का कहना है कि जब उन्होंने एआई को बताया कि दी गई जानकारी गलत है और पूछा कि इस पर मुकदमा क्यों न किया जाए, तो एआई ने पहले अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी। इसके बाद दूसरा उत्तर दिया गया, जिसमें कहा गया कि शिव-पार्वती का विवाह माघ महीने की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि से जुड़ा माना जाता है और इस विषय में अलग-अलग मत भी प्रचलित हैं।
अधिवक्ता का कहना है कि बार-बार बदलती जानकारी यह दर्शाती है कि एआई प्लेटफॉर्म धार्मिक विषयों पर सटीक और प्रमाणिक जानकारी देने में पूरी तरह सक्षम नहीं है। इसी आधार पर उन्होंने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173(4) के तहत अदालत में प्रकीर्ण वाद दाखिल किया है।
अदालत ने मांगी पुलिस रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान अदालत ने सारनाथ थाने से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अब पुलिस की रिपोर्ट और अगली सुनवाई के बाद यह तय होगा कि इस मामले में आगे क्या कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
पहले भी चर्चा में रहे हैं नागेश्वर मिश्रा
तिलमापुर गांव के पूर्व प्रधान और अधिवक्ता नागेश्वर मिश्रा इससे पहले भी अपने कानूनी कदमों को लेकर चर्चा में रह चुके हैं। उन्होंने वाराणसी के एमपी-एमएलए कोर्ट में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ भी परिवाद दायर किया था। उस याचिका में अमेरिका में दिए गए एक बयान को सिख समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाला बताया गया था।अब मेटा एआई से जुड़ा यह नया मामला सामने आने के बाद तकनीक, सूचना की सटीकता और धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन को लेकर एक नई कानूनी बहस शुरू हो गई है।





