
- रिपोर्ट :राजीव आनन्द
लोकदल अध्यक्ष सुनील सिंह ने सरकार द्वारा लागू की जा रही एसआईआर प्रक्रिया की कड़ी आलोचना करते हुए इसे अव्यवस्थित, अपारदर्शी और आम लोगों के लिए कष्टदायक बताया है।
दावे कुछ, जमीनी हकीकत कुछ और
आयोग का दावा है कि अब तक 96.22 प्रतिशत गणना प्रपत्र (फॉर्म) वितरित कर दिए गए हैं, लेकिन विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार 60 प्रतिशत से अधिक नागरिकों को अभी तक यह प्रपत्र मिले ही नहीं हैं।
यह आंकड़े सरकार के दावों और वास्तविक स्थिति के बीच गहरे अंतर को उजागर करते हैं।
गांव और शहर दोनों में फैली अव्यवस्था
एसआईआर प्रक्रिया को लेकर न तो स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं और न ही लोगों को उचित मार्गदर्शन मिला है।
स्थिति यह है कि ग्रामीण और शहरी—दोनों क्षेत्रों में लोग परेशान हैं और जगह-जगह हाहाकार मचा हुआ है।
सबसे अधिक प्रभावित गरीब और वंचित वर्ग
सुनील सिंह का आरोप है कि गरीब, मजदूर और हाशिये पर रहने वाले लोगों को लगातार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
“पहचान” से संबंधित दस्तावेज़ों को अपडेट कराने के नाम पर उन्हें समय, पैसा और श्रम—तीनों खर्च करने पड़ रहे हैं।
जनता पर बढ़ रहा अनावश्यक बोझ
लोकदल अध्यक्ष का कहना है कि किसी भी सरकारी प्रक्रिया का उद्देश्य जनता को सुविधा देना होना चाहिए, न कि उन्हें भय, भ्रम और अनावश्यक बोझ के बोझ तले दबाना।
उन्होंने सरकार से एसआईआर प्रक्रिया की संपूर्ण समीक्षा, पारदर्शिता और बेहतर प्रबंधन की तत्काल मांग की है, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।




