
नई दिल्ली: दिवाली के कुछ दिनों बाद आने वाला देव दीपावली का पर्व उत्तर प्रदेश की पवित्र नगरी काशी (वाराणसी) में अत्यंत धूमधाम से मनाया जाता है। इस साल देव दीपावली 5 नवंबर 2025 (बुधवार) को मनाई जाएगी। इस अवसर पर काशी में तैयारियां जोरों पर हैं। हर साल की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान करेंगे और दीपदान कर अपनी श्रद्धा प्रकट करेंगे।
देव दीपावली के दिन भगवान शिव की नगरी काशी दीपों की रोशनी से जगमगा उठती है। गंगा के दोनों किनारे लाखों दीपों से सजाए जाते हैं और इस दृश्य की भव्यता देखते ही बनती है।
🔸 क्यों मनाई जाती है देव दीपावली?
पौराणिक कथा के अनुसार, त्रिपुरासुर नामक राक्षस के आतंक से पृथ्वी और स्वर्ग दोनों लोकों में हाहाकार मच गया था। तब सभी देवगणों ने भगवान शिव से सहायता की गुहार लगाई। भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का संहार किया और इस प्रकार संसार को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया।
कहते हैं, जिस दिन त्रिपुरासुर का वध हुआ और देवता प्रसन्न होकर काशी पहुंचे, वह दिन कार्तिक मास की पूर्णिमा का था। देवताओं ने भगवान शिव का आभार प्रकट करने के लिए गंगा तट पर दीप जलाकर उत्सव मनाया। तभी से यह दिन देव दीपावली के रूप में मनाया जाता है।
🔸 काशी से जुड़ा गहरा संबंध
देव दीपावली का पर्व विशेष रूप से काशी में ही मनाया जाता है, क्योंकि यही वह स्थान है जहाँ भगवान शिव स्वयं विराजमान हैं। कथा के अनुसार, देवताओं ने यहीं आकर गंगा स्नान किया और दीपदान के माध्यम से आभार व्यक्त किया था। तब से हर वर्ष काशी में कार्तिक पूर्णिमा के दिन यह पर्व मनाया जाता है, जब गंगा तट हजारों दीपों से सज उठता है।
इस दिन काशी में गंगा आरती, सांस्कृतिक कार्यक्रम और दीपदान का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। पूरा शहर दिव्य प्रकाश से आलोकित होता है, मानो स्वयं देवता धरती पर उतर आए हों।
डिस्क्लेमर:
यह लेख धार्मिक और सामाजिक आस्थाओं पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारियों की स्वतंत्र पुष्टि India.com नहीं करता। किसी भी धार्मिक या आध्यात्मिक निर्णय से पहले विशेषज्ञ या पुरोहित की सलाह अवश्य लें।




